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Monday, 25 May 2020

बड़ा मंगल 2020

बड़े मंगल की शुभकामनाएं

मनोकामना पूर्ति मन्त्र
( रक्षाहेतु, रोग, ऋण, शत्रु, भय निवारण हेतु)

महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते।
हारिणे वज्र देहायचोलंग्घितमहाव्यये।।
ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकराय रामदूताय स्वाहा
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा।

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।।जय श्री राम।।

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Wednesday, 6 May 2020

Gorakhnath & kitna jayant 2020i special गोरखनाथ एवं कूर्म जयंती 2020 विशेष

श्री विष्णु स्वरूप कूर्म एवं बुद्ध जयंती तथा
शिव स्वरूप बाबा गोरखनाथ जयंती की शुभकामनाएं

रोग एवं तंत्र मंत्र निवारण मन्त्र

ॐ वज्र में कोठा, वज्र में ताला, वज्र में बंध्या दस्ते द्वारा, तहां वज्र का लग्या किवाड़ा, वज्र में चौखट, वज्र में कील, जहां से आय, तहां ही जावे, जाने भेजा, जांकू खाए, हमको फेर न सूरत दिखाए, हाथ कूँ, नाक कूँ, सिर कूँ, पीठ कूँ, कमर कूँ, छाती कूँ जो जोखो पहुंचाए, तो गुरु गोरखनाथ की आज्ञा फुरे, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र इश्वरोवाचा

कूर्म जयंती महत्व

जिस दिन भगवान विष्णु जी ने कूर्म का रूप धारण किया था उसी तिथि को कूर्म जयंती के रूप में मनाया जाता है. शास्त्रों नें इस दिन की बहुत महत्ता मानी गई है. इस दिन से निर्माण संबंधी कार्य शुरू किया जाना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि योगमाया स्वरूपा बगलामुखी स्तम्भित शक्ति के साथ कूर्म में निवास करती है. कूर्म जयंती के अवसर पर वास्तु दोष दूर किए ज सकते हैं, नया घर भूमि आदि के पूजन के लिए यह सबसे उत्तम समय होता है तथा बुरे वास्तु को शुभ में बदला जा सकता है.

श्री कूर्म भगवान मन्त्र

ॐ श्रीं कूर्माय नम:।

श्री कूर्म भगवान के कुछ सरल प्रयोग

1) महावास्तु दोष निवारक मंत्र
दुर्भाग्य बश यदि आपका पूरा मकान निवास स्थान या फ्लेट ही वास्तु विरुद्ध बन गया हो और आप किसी भी हालत में उसमें सुधार नहीं कर सकते
तो केवल महावास्तु मंत्र का जाप एवं कूर्म देवता की पूजा करनी चाहिए जिसका विधान है कि

सबसे पहले लाल चन्दन और केसर कुमकुम मिला कर एक पवित्र स्थान पर कछुए की आकृति बना लेँ
कछुए के मुख की ओर सूर्य तथा पूछ की ओर चन्द्रमा बना लेँ
सुबिधानुसार आप धातु का बना कछुआ भी पूजन हेतु प्रयुक्त कर सकते हैं
फिर धूप दीप फल ओर गंगाजल या समुद्र का जल अर्पित करें
भूमि पर ही आसन बिछ कर रुद्राक्ष माला से 11 माला मंत्र का जाप करें।

मंत्र- ॐ ह्रीं कूर्माय वास्तु पुरुषाय स्वाहा

जाप पूरा होने के बाद घर अथवा निवास स्थान के चारों ओर एक एक कछुए का छोटा निशान बना दें
ऐसा करने से पूरी तरह वास्तु दोष से ग्रसित घर भी दोष मुक्त हो जाता है दिशाएं नकारात्मक प्रभाव नहीं दे पाती उर्जा परिवर्तित हो जाती है

2)वास्तु दोष निवारक महायंत्र
यदि आप ऐसी हालत में भी नहीं हैं कि पूजा पाठ या मंत्र का जाप कर सकें और आप नकारात्मक वास्तु के कारण बेहद परेशान है
घर दूकान या आफिस को बिना तोड़े फोड़े सुधारना चाहते हैं तो उसका दिव्य उपाय है महायंत्र
वास्तु का तीब्र प्रभावी यन्त्र
----------------------------------
121 177 944
----------------------------------
533 291 311
----------------------------------
657 111 312
----------------------------------
यन्त्र को आप सादे कागज़ भोजपत्र या ताम्बे चाँदी अष्टधातु पर बनवा सकते हैं
यन्त्र के बन जाने पर यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए
प्राण प्रतिष्ठा के लिए पुष्प धूप दीप अक्षत आदि ले कर यन्त्र को अर्पित करें
पंचामृत से सनान कराते हुये या छींटे देते हुये 21 बार मंत्र का उच्चारण करें

मंत्र-ॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:

अब पीले रंग या भगवे रंग के वस्त्र में लपेट कर इस यन्त्र को घर दूकान या कार्यालय में स्थापित कर दीजिये

पुष्प माला अवश्य अर्पित करें
इस प्रयोग से शीघ्र ही वास्तु दोष हट जाएगा

3) तनाव मुक्ति हेतु

चांदी के गिलास बर्तन या पात्र पर कछुए का चिन्ह बना कर भोजन करने व पानी पीने से भारी से भारी तनाब नष्ट होता है ।

4) उत्तम स्वास्थ्य हेतु

चार पायी बेड अथवा शयन कक्ष में धातु का कूर्म अर्थात कछुआ रखने से गहरी और सुखद निद्रा आती है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होती है ।

रसोई घर में कूर्म की स्थापना करने से वहां पकने वाला भोजन रोगमुक्ति के गुण लिए भक्त को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है ।

5) कूर्म श्री यन्त्र

कछुवे की पीठ पर श्री यन्त्र समतल अथवा पिरामिड आकार में प्रायः देखने को मिल जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से जहां ये काम, क्रोध, लोभ, मोह का शमन कर कुंडली जागरण द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक है। वहीं दूसरी ओर भौतिक सुखों की छह रखने वालों के लिए ये स्थिर लक्ष्मी, सम्पदा, सौख्य और विजय देने का भी प्रतीक माना जाता है।

6) नए भवन निर्माण में समृद्धि हेतु

यदि नया भवन बना रहे हैं तो आधार में चाँदी का कछुआ ड़ाल देने से घर में रहने वाला परिवार खूब फलता-फूलता है ।

7) शिक्षा में स्थिर चित्त हेतु

बच्चों को विद्या लाभ व राजकीय लाभ मिले इसके लिए उनसे कूर्म की उपासना करवानी चाहिए तथा मिटटी के कछुए उनके कक्ष में स्थापित करें ।

8) विवाद विजय में

यदि आपका घर किसी विवाद में पड़ गया हो या घर का संपत्ति का विवाद कोर्ट कचहरी तक पहुँच गया हो तो लोहे का कूर्म बना कर शनि मंदिर में दान करना चाहिए ।

9) शत्रु मुक्ति

घर की छत में कूर्म की स्थापना से शत्रु नाश होता है उनपर विजय मिलती है।

10)भूमि दोष नाशक मंत्र उपाय

यदि आपका घर या जमीन ऐसी जगह है जहाँ भूमि में ही दोष है
आपका घर किसी श्मशान भूमि ,कब्रगाह ,दुर्घटना स्थल या युद्ध भूमि पर बना है या कोई अशुभ साया या जमीनी अशुभ तत्व स्थान में समाहित हों
जिस कारण सदा भय कलह हानि रोग तानाब बना रहता हो तो जमीन में मिटटी के कूर्म की स्थापना करनी चाहिए
एक मिटटी का कछुआ ले कर उसका पूजन करें
पूजन के लिए घर के ब्रह्मस्थल में भूमि पर लाल वस्त्र बिछा लेँ
फिर गंगाजल से स्नान करवा कर कुमकुम से तिलक करें
पंचोपचार पूजा करें अर्थात धूप दीप जल वस्त्र फल अर्पित करें चने का प्रसाद बनाये व बांटे

7 माला मंत्र जाप पूर्व दिशा की और मुख रख कर करें

मंत्र-ॐ आधार पुरुषाय जाग्रय-जाग्रय तर्पयामि स्वाहा।

साथ ही एक माला पूरी होने पर एक बार कछुए पर पानी छिड़कें

संध्या के समय भूमि में तीन फिट गढ्ढा कर गाड़ दें
समस्त भूमि दोष दूर होंगे

11) अदृश्य शक्ति नाशक प्रयोग

यदि आपको लगता है कि आपके घर में कोई अदृश्य शक्ति है ,किसी तरह की कोई बाधा है तो कूर्म की पूजा कर उसे मौली बाँध दें ,लाल कपडे में बंद कर धूप दीप करें , निम्न मन्त्र का 11 माला जप करें

मंत्र-ॐ हां ग्रीं कूर्मासने बाधाम नाशय नाशय ।

रात के समय इसे द्वार पर रखे तथा सुबह नदी में प्रवाहित कर दें
इससे घर में शीघ्र शांति हो जायेगी।

12)भूमि भवन सुख दायक प्रयोग

यदि आपको लगता है कि आपके पास ही घर क्यों नहीं है? आपके पास ही संपत्ति क्यों नहीं है?
क्या इतनी बड़ी दुनिया में आपको थोड़ी सी जगह मिलेगी भी या नहीं ? तो इसके लिए केवल कूर्म स्वरुप विष्णु जी की पूजा कीजिये

विष्णु जी की प्रतिमा के सामने कूर्म की प्रतिमा रखें या कागज पर बना कर स्थापित करें
इस कछुए के नीचे नौ बार नौ का अंक लिख दें
भगवान् को पीले फल व पीले वस्त्र चढ़ाएं
तुलसी दल कूर्म पर रखें और पुष्प अर्पित कर भगवान् की आरती करें
आरती के बाद प्रसाद बांटे व कूर्म को ले जा कर किसी अलमारी आदि में छुपा कर रख लेँ
इस प्रयोग से भूमि संपत्ति भवन के योग रहित जातक को भी इनका सुख प्राप्त होता है।

13) वास्तु स्थापन प्रयोग
यदि आपका दरवाजा खिड़की कमरा रसोई घर सही दिशा में नहीं हैं तो उनको तोड़ने की बजाये
उनपर कछुए का निशान इस तरह से बनाये कि कछुए का मुख नीचे जमीन की ओर हो और पूंछ आकाश की ओर
ये प्रयोग शाम को गोधुली की बेला में करना चाहिए
कछुए को रक्त चन्दन ,कुमकुम ,केसर के मिश्रण से बनी स्याही से बनाएं।
कछुए का निर्माण करते समय मानसिक मंत्र का जाप करते रहें
मंत्र-ॐ कूर्मासनाय नम:
कछुया बन जाने पर धूप दीप कर गंगा जल के छीटे दें
और धूप दिखाएँ।
इस तरह प्रयोग करने से गलत दिशा में बने द्वार खिड़की कक्ष आदि को तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती ऐसा विद्वानों का कथन है।

14) व्यापार वृद्धि हेतु

अष्टधातु या चाँदी से निर्मित कूर्म विधिवत पूजन कर अपने कैश काउंटर या मेज पर इस प्रकार रखें की उसका मुख बाहर प्रवेश द्वार की ओर रहे। आने जाने वाले सभी लोगों की नज़र उस पर पड़े।

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Tuesday, 5 May 2020

नरसिंह एवं छिन्नमस्ता जयंती 2020 विशेष शाबर मंत्र

श्री नरसिंह एवं माँ छिन्नमस्ता जयंती की शुभकामनाएं

छिन्नमस्ता गायत्री मंत्र:-

ॐ वैरोचनीयै च विदमहे छिन्नमस्तायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥

 छिन्नमस्ता शाबर मन्त्र:-

सत का धर्म सत की काया, ब्रह्म अग्नि में योग जमाया । काया तपाये जोगी (शिव गोरख) बैठा, नाभ कमल पर छिन्नमस्ता, चन्द सूर में उपजी सुष्मनी देवी, त्रिकुटी महल में फिरे बाला सुन्दरी, तन का मुन्डा हाथ में लिन्हा, दाहिने हाथ में खप्पर धार्या । पी पी पीवे रक्त, बरसे त्रिकुट मस्तक पर अग्नि प्रजाली, श्वेत वर्णी मुक्त केशा कैची धारी । देवी उमा की शक्ति छाया, प्रलयी खाये सृष्टि सारी । चण्डी, चण्डी फिरे ब्रह्माण्डी भख भख बाला भख दुष्ट को मुष्ट जती, सती को रख, योगी घर जोगन बैठी, श्री शम्भुजती गुरु गोरखनाथजी ने भाखी । छिन्नमस्ता जपो जाप, पाप कन्टन्ते आपो आप, जो जोगी करे सुमिरण पाप पुण्य से न्यारा रहे । काल ना खाये ।

मंत्र  श्रीं क्लीं ह्रीं ऐं वज्रवैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा।

****श्री नरसिंह****

 नरसिंह गायत्री:-

ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि |तन्नो नरसिंह प्रचोदयात ||

नृसिंह शाबर मन्त्र :-

ॐ नमो भगवते नारसिंहाय -घोर रौद्र महिषासुर रूपाय
,त्रेलोक्यडम्बराय रोद्र क्षेत्रपालाय ह्रों ह्रों
क्री क्री क्री ताडय
ताडय मोहे मोहे द्रम्भी द्रम्भी
क्षोभय क्षोभय आभि आभि साधय साधय ह्रीं
हृदये आं शक्तये प्रीतिं ललाटे बन्धय बन्धय
ह्रीं हृदये स्तम्भय स्तम्भय किलि किलि ईम
ह्रीं डाकिनिं प्रच्छादय २ शाकिनिं प्रच्छादय २ भूतं
प्रच्छादय २ प्रेतं प्रच्छादय २ ब्रंहंराक्षसं सर्व योनिम
प्रच्छादय २ राक्षसं प्रच्छादय २ सिन्हिनी पुत्रं
प्रच्छादय २ अप्रभूति अदूरि स्वाहा एते डाकिनी
ग्रहं साधय साधय शाकिनी ग्रहं साधय साधय
अनेन मन्त्रेन डाकिनी शाकिनी भूत
प्रेत पिशाचादि एकाहिक द्वयाहिक् त्र्याहिक चाथुर्थिक पञ्च
वातिक पैत्तिक श्लेष्मिक संनिपात केशरि डाकिनी
ग्रहादि मुञ्च मुञ्च स्वाहा मेरी भक्ति गुरु
की शक्ति स्फ़ुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा ll

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Friday, 1 May 2020

Janki navmi 2020 Sita ashtottarshatnam जानकी नवमी 2020 सीता अष्टोत्तरशतनाम

जानकी नवमी की शुभकामनाएं

यह त्योहार माता जानकी के जन्म से जुड़ा हुआ है. ऐसा कहा जाता है कि जानकी नवमी के दिन राजा जनक को माता सीता मिली थीं. कुछ स्थानों पर जानकी नवमी को ही सीता नवमी भी कहा जाता है.

इस बार जानकी नवमी का मुहूर्त

प्रातः काल 10:58 से दोपहर 01:38 मिनट तक

जानकी नवमी पूजा से लाभ

- ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्त जानकी नवमी के दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

- जिन लोगों के जीवन में सुख और शांति की कमी होती है उन्हें भी जानकी नवमी के दिन व्रत रखने के लिए कहा जाता है.

सीता अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र

ध्यानम् ॥

वामाङ्गे रघुनायकस्य रुचिरे या संस्थिता शोभना
या विप्राधिप यान रम्य नयना या विप्रपालानना ।
विद्युत्पुञ्ज विराजमान वसना भक्तार्ति सङ्खण्डना
श्रीमद् राघव पादपद्मयुगळ न्यस्तेक्षणा सावतु ॥

श्री सीता जानकी देवी वैदेही राघवप्रिया ।
रमावनिसुता रामा राक्षसान्त प्रकारिणी ॥ १
रत्नगुप्ता मातुलिङ्गी मैथिली भक्ततोषदा ।
पद्माक्षजा कञ्जनेत्रा स्मितास्या नूपुरस्वना ॥ २
वैकुण्ठनिलया मा श्रीः मुक्तिदा कामपूरणी ।
नृपात्मजा हेमवर्णा मृदुलाङ्गी सुभाषिणी ॥ ३
कुशाम्बिका दिव्यदाच लवमाता मनोहरा ।
हनूमद् वन्दितपदा मुग्धा केयूर धारिणी ॥ ४
अशोकवन मध्यस्था रावणादिग मोहिनी ।
विमानसंस्थिता सुभ्रू सुकेशी रशनान्विता ॥ ५
रजोरूपा सत्वरूपा तामसी वह्निवसिनी ।
हेममृगासक्त चित्ता वाल्मीकाश्रम वासिनी ॥ ६
पतिव्रता महामाया पीतकौशेय वासिनी ।
मृगनेत्रा च बिम्बोष्ठी धनुर्विद्या विशारदा ॥ ७
सौम्यरूपा दशरथस्नुषा चामर वीजिता ।
सुमेधा दुहिता दिव्यरूपा त्रैलोक्यपालिनि ॥ ८
अन्नपूर्णा महालक्ष्मीः धीर्लज्जा च सरस्वती ।
शान्तिः पुष्टिः शमा गौरी प्रभायोध्या निवासिनी ॥ ९
वसन्तशीलता गौरी स्नान सन्तुष्ट मानसा ।
रमानाम भद्रसंस्था हेमकुम्भ पयोधरा ॥ १०
सुरार्चिता धृतिः कान्तिः स्मृतिर्मेधा विभावरी ।
लघूदरा वरारोहा हेमकङ्कण मण्डिता ॥ ११
द्विज पत्न्यर्पित निजभूषा राघव तोषिणी ।
श्रीराम सेवन रता रत्न ताटङ्क धारिणी ॥ १२
रामावामाङ्ग संस्था च रामचन्द्रैक रञ्जिनी ।
सरयूजल सङ्क्रीडा कारिणी राममोहिनी ॥ १३
सुवर्ण तुलिता पुण्या पुण्यकीर्तिः कलावती ।
कलकण्ठा कम्बुकण्ठा रम्भोरूर्गजगामिनी ॥ १४
रामार्पितमना रामवन्दिता रामवल्लभा ।
श्रीरामपद चिह्नाङ्गा राम रामेति भाषिणी ॥ १५
रामपर्यङ्क शयना रामाङ्घ्रि क्षालिणी वरा ।
कामधेन्वन्न सन्तुष्टा मातुलिङ्ग कराधृता ॥ १६
दिव्यचन्दन संस्था श्री मूलकासुर मर्दिनी ।
एवं अष्टोत्तरशतं सीतानाम्नां सुपुण्यदम् ॥ १७
ये पठन्ति नरा भूम्यां ते धन्याः स्वर्गगामिनः ।
अष्टोत्तरशतं नाम्नां सीतायाः स्तोत्रमुत्तमम् ॥ १८
जपनीयं प्रयत्नेन सर्वदा भक्ति पूर्वकं ।
सन्ति स्तोत्राण्यनेका नि पुण्यदानि महान्ति च ॥ १९
नानेन सदृशानीह तानि सर्वाणि भूसुर ।
स्तोत्राणामुत्तमं चेदं भुक्ति मुक्ति प्रदं नृणाम् ॥ २०
एवं सुतीष्ण ते प्रोक्तं अष्टोत्तरशतं शुभं ।
सीतानाम्नां पुण्यदञ्च श्रवणान् मङ्गळ प्रदम् ॥ २१
नरैः प्रातः समुत्थाय पठितव्यं प्रयत्नतः ।
सीता पूजन कालेपि सर्व वाञ्छितदायकम् ॥ २२

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Bagulamukhi jayanti 2020 बगुलामुखी जयंती 2020

बगुलामुखी जयंती की शुभकामनाएं

बगलामुखी माला मन्त्र

ॐ नमो भगवति ॐ नमो वीरप्रतापविजयभगवति बगलामुखि मम सर्वनिन्दकानां सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां मुद्रय मुद्रय बुद्धिं विनाशय विनाशय, अपरबुद्धिं कुरु कुरु आत्मविरोधिनां शत्रुणां शिरो ललाटं मुखं नेत्र कर्ण नासिकोरु पद अणुरेणु दन्तोष्ठ जिह्वा तालु गुह्य गुदा कटि जानू सर्वांगेषु केशादिपादान्तं पादादिकेशपर्यन्तं स्तम्भय स्तम्भय, खें खीं मारय मारय, परमन्त्र परयन्त्र परतन्त्राणि छेदय छेदय, आत्ममन्त्रतन्त्राणि रक्ष रक्ष, ग्रहं निवारय निवारय, व्याधिं विनाशय विनाशय, दुःखं हर हर, दारिद्रयं निवारय निवारय, सर्वमन्त्रस्वरूपिणी, दुष्टग्रह भूतग्रह पाषाणग्रह सर्व चाण्डालग्रह यक्षकिन्नरकिम्पुरुषग्रह भूतप्रेतपिशाचानां शाकिनी डाकिनीग्रहाणां पूर्वदिशां बन्धय बन्धय, वार्तालि मां रक्ष रक्ष, दक्षिणदिशां बन्धय बन्धय, किरातवार्तालि मां रक्ष रक्ष, पश्चिमदिशां बन्धय बन्धय , स्वप्नवार्तालि मां रक्ष रक्ष,  उत्तरदिशां बन्धय बन्धय, भद्रकालि मां रक्ष रक्ष, ऊर्ध्वदिशां बन्धय-बन्धय, उग्रकालि मां रक्ष रक्ष, पातालदिशां बन्धय बन्धय , बगलापरमेश्वरि मां रक्ष रक्ष, सकलरोगान् विनाशय विनाशय, शत्रू पलायनाम पञ्चयोजनमध्ये राजजनस्वपचम कुरु कुरु , शत्रून् दह दह, पच पच, स्तम्भय स्तम्भय, मोहय मोहय, आकर्षय आकर्षय, मम शत्रून् उच्चाटय उच्चाटय, ह्लीं फट् स्वाहा।

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Wednesday, 29 April 2020

गंगा जयंती 2020

गंगा अवतरण  की शुभकामनाएँ

   
गंगा जयंती हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है. वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई इस कारण इस पवित्र तिथि को गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है.

गंगा जयंती के शुभ अवसर पर गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है. वैशाख शुक्ल सप्तमी का दिन संपूर्ण भारत में श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाता है यह तिथि पवित्र नदी गंगा के पृथ्वी पर आने का पर्व है गंगा जयंती. स्कन्दपुराण, वाल्मीकि रामायण आदि ग्रंथों में गंगा जन्म की कथा वर्णित है.

भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में दर्शाया गया है. अनेक पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं. गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है. लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं तथा मृत्यु पश्चात गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं. लोग गंगा घाटों पर पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं.

गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक माना गया है. गंगाजल को अमृत समान माना गया है. अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, दान एवं दर्शन करना महत्त्वपूर्ण समझा माना गया है. गंगा पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है. गंगा तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में सांस्कृतिक एकता स्थापित करता है गंगा जी के अनेक भक्ति ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्रम एवं गंगा आरती बहुत लोकप्रिय हैं.

गंगा जन्म कथा

गंगा नदी हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और अनेक धर्म ग्रंथों में गंगा के महत्व का वर्णन प्राप्त होता है गंगा नदी के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं जो गंगा जी के संपूर्ण अर्थ को परिभाषित करने में सहायक है.  इसमें एक कथा अनुसार गंगा का जन्म भगवान विष्णु के पैर के पसीनों की बूँदों से हुआ गंगा के जन्म की कथाओं में अतिरिक्त अन्य कथाएँ भी हैं. जिसके अनुसार गंगा का जन्म ब्रह्मदेव के कमंडल से हुआ.

एक मान्यता है कि वामन रूप में राक्षस बलि से संसार को मुक्त कराने के बाद ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु के चरण धोए और इस जल को अपने कमंडल में भर लिया और एक अन्य कथा अनुसार जब भगवान शिव ने नारद मुनि, ब्रह्मदेव तथा भगवान विष्णु के समक्ष गाना गाया तो इस संगीत के प्रभाव से भगवान विष्णु का पसीना बहकर निकलने लगा जिसे ब्रह्मा जी ने उसे अपने कमंडल में भर लिया और इसी कमंडल के जल से गंगा का जन्म हुआ था.

गंगा जयंती महत्व

शास्त्रों के अनुसार बैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ही गंगा स्वर्ग लोक से शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थी इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है.  जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन 'गंगा दशहरा' (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है इस दिन मां गंगा का पूजन किया जाता है.  गंगा जयंती के दिन गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है. विधिविधान से गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता है.

पुराणों के अनुसा गंगा विष्णु के अँगूठे से निकली हैं, जिसका पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ के प्रयास से कपिल मुनि के शाप द्वारा भस्मीकृत हुए राजा सगर के 60,000 पुत्रों की अस्थियों का उद्धार  करने के लिए हुआ था  तब उनके उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर माता गंगा को प्रसन्न किया और धरती पर लेकर आए। गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार संभव हो सका  इसी कारण गंगा का दूसरा नाम भागीरथी हुआ।

।।जय श्री राम।।

Saturday, 25 April 2020

अक्षय तृतीया 2020 akshay tritiya 2020

अक्षय फलदायी अक्षय तृतीया


अक्षय तृतीया मुहूर्त
अक्षय तृतीया - 26 अप्रैल 2020,
अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त – 05:48 से 12:19
तृतीया तिथि प्रारंभ – 11:51 (25 अप्रैल 2020)
तृतीया तिथि समाप्ति – 13:22 (26 अप्रैल 2020)

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “अक्षय तृतीया” या “आखा तृतीया” अथवा “आखातीज” भी कहते हैं। “अक्षय” का शब्दिक अर्थ है – जिसका कभी नाश (क्षय) न हो अथवा जो स्थायी रहे। स्थायी वहीं रह सकता है जो सर्वदा सत्य है। सत्य केवल परमात्मा है जो अक्षय, अखण्ड और सर्वव्यापक है।


शास्त्रों की इस मान्यता को वर्तमान में व्यापारिक रूप दे दिया गया है जिसके कारण अक्षय तृतीया के मूल उद्देश्य से हटकर लोग खरीदारी में लगे रहते हैं। वास्तव में यह वस्तु खरीदने का दिन नहीं है। वस्तु की खरीदारी में आपका संचित धन खर्च होता है

। “न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्। 
न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गङग्या समम्।।” 

मत्स्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन अक्षत पुष्प दीप आदि द्वारा भगवान विष्णु की आराधना करने से विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा सँतान भी अक्षय बनी रहती है इस दिन दीन दुःखीयोँ की सेवा करना,वस्त्रादि का दान करना ओर शुभ कर्मोँ की ओर अग्रसर रहते हुए मन वचन ओर अपने कर्म से अपने मनुष्य धर्म का पालन करना ही अक्षय तृतीया पर्व की सार्थकता है कलियुग के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करके दान अवश्य करना चाहिए|ऐसा करने से निश्चय ही अगले जन्म मेँ समृद्धि ऐश्वर्य व सुख की प्राप्ति होती है

क्या करें दान

अक्षय तृतीया को पवित्र तिथी माना गया है इस दिन गँगा यमुना आदि पवित्र नदियोँ मेँ स्नान करके श्रद्धा भाव से अपने सामर्थ्य के अनुसार 
जल, अनाज, गन्ना, दही, सत्तू, फल, सुराही, 
हाथ से बने पँखे वस्त्रादि का दान करना 
विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है।

दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित करने के लिए यह दिवस सर्वश्रेष्ठ है।

धन के इच्छुक लोगों को-ब्राहमण पूजा करते हुये दानादि शुभ कर्म करने चाहिए व गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए, अक्षय तृतीया के दिन मंत्र साधना भी अक्षय फल प्रदान करती है अक्षय तृतीया के दिन माँ लक्ष्मी सहित व्बिष्णु जी व देवी शक्ति सहित शिव की पूजा करनी चाहिए, विशेष तौर पर गणपति की पूजा घर में धन वैभव ले कर आती है, पूजा के समय घर पर यन्त्र स्थापित करना चाहिए जो आयु आरोग्य और धन प्रदान करें,

कुछ प्रयोग:-

(1) कार्य में सफलता हेतु

श्वेतार्क या स्फटिक के गणपति जी की स्थापना और पूजन करना चाहिए। यदि काम बनते बनते बिगड़ जाते हैं या मन्ज़िल तक पहुँच कर हाथ से निकल जाते हैं तो किसी विद्वान ब्राह्मण से श्वेतार्क का ताबीज़ बनवा कर सिद्ध करवा कर पहनना चाहिए।

(2) लक्ष्मी प्राप्ति हेतु

(क)-ग्रंथों में लक्ष्मी, यश- कीर्ति की प्राप्ति उपाय के रूप में कई उपाय मिलते हैं। लक्ष्मी गायत्री मंत्र का निरंतर जाप भी इष्टप्रद है।

'महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च
धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।'
कमल गट्टे की माला से कम से कम 11 माला जप करें।

(ख) माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र को ताम्बे की बड़ी थाली में स्थापित कर पूजना चाहिए, देवी को धूप दीप, नवैद्य,पंचामृत व दक्षिणा अर्पित करें, उत्तर दिशा की ओर मुख रख कर मंत्र का जाप करें, 9 माला मंत्र जाप 21 दिन करना चाहिए, लाल रंग के आसन पर बैठ कर ही जाप करें, खीर का प्रसाद चढ़ाएं व बाँटें, देवी को नारियल व पुष्प माला अर्पित करें 
मंत्र-

ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं कमलवासिन्यै स्वाहा:। 

(ग) चांदी की एक छोटी सी ढक्कन वाली डिबिया लें। इसमें नागकेसर व शहद भरकर शुक्ल पक्ष के शुक्रवार की रात को या अन्य किसी शुभ मुहूर्त में अपने गल्ले या तिजोरी में रख दें। आपकी धन में अचानक वृद्धि होने लगेगी। - नागकेसर के फूल लेकर शुक्रवार के दिन पूजन के बाद एक कपड़े में लपेटकर अपनी दुकान के गल्ले या अपने ऑफिस के केश बॉक्स में रखें तो धन की आवक कभी कम नहीं होगी। 

(घ) यदि आपके व्यवसाय में निरन्तर गिरावट आ रही है, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरूवार को पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र, चांदी का सिक्का व 11 अभिमंत्रित धनदायक कौड़ियां बांधकर 108 बार
ऊँ नमो भगवते वासुदेव नमः
का जाप कर धन रखने के स्थान पर रखने से व्यवसाय में प्रगतिशीलता आ जाती है।

( ङ) अक्षय तृतीया पर एक लाल कपड़े में मोती शंख , गोमती चक्र, लघु नारियल, पीली कौड़ी और चाँदी के सिक्के का माँ लक्ष्मी के सामने पूजन कर 21 पाठ  श्री सूक्त का करे और पोटली बना कर मन्दिर में स्थापित कर दें। पोटली खोले बिना नित्य ऊपर से ही धूप दीप करें। थोड़े ही दिनों में आर्थिक समस्या समाप्त होने लगेगी।

(3)  मातङ्गी जयंती :-
 आज के दिन महाविद्या मां मातंगी का अवतरण दिवस भी मनाया जाता है, वो कला, संगीत, और दिव्य शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं।
ऐसे में उनकी प्रसन्नता के लिए उन्हें गुंजा की माला अर्पण करें , गुंजा माला देवी को अत्यधिक प्रिय है 

(क) देवी मातंगी गायत्री मंत्र :

ॐ शुकप्रियाये विद्महे श्रीकामेश्वर्ये धीमहि
    तन्न: श्यामा प्रचोदयात।

(ख) अभिनय कला संगीत में सफलता हेतु

मातंगी माता का मंत्र स्फटिक की माला से बारह माला करना चाहिए

‘ऊँ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा:’

(4) आरोग्य और संतान हेतु

आरोग्य और सन्तान प्राप्ति हेतु भग७वान शिव का रुद्राभिषेक करवाएं। यदि सम्भव न हो तो रोगी के परिवार जन शिव सहस्त्रनाम का पाठ करें और रोगी स्वयं जलाभिषेक करे। निसन्तान दम्पति में पति साउच्चारण सहस्त्रनाम पाठ करे और पत्नी लिंग पर अटूट जलाभिषेक करे।


(5) पारिवारिक सुख शांति उन्नति हेतु

माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करके घर- परिवार में वैभव की प्रतिष्ठा की जा सकती है। प्रातः काल, स्नानादि व तुलसी सेवन करके

'हरिजागरणं प्रातः स्नानं तुलसीसेवनम्। 
उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके॥'

इस मंत्र के साथ दीपदान करें| इसी मंत्र के द्वारा सत्यभामा ने अक्षय सुख, सौभाग्य और संपदा के साथ सर्वेश्वर को सुलभ किया था।

(6) दरिद्रता निवारण

माता अन्नपूर्णा अथवा शाकम्भरी का पूजन करें

धूप दीप पुष्प नारियल अर्पित कर हलवे और पूड़ी का भोग लगाएं

माता शाकंभरी को कच्चे ऋतु फल सब्जियों का भोग लगाएं

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति माहेश्वरि अन्नपूर्णे स्वाहा।।'

(7) हनुमान जी को करें प्रसन्न

मंगलवार को अक्षय तीज पड़ने से हनुमान जी के भक्तों के लिए भी ये एक विशिष्ट मौका है।
इस दिन हनुमान जी की प्रसन्नता के लिए उनके मन्दिर जाकर उनके सम्मुख आटे का 5 बत्ती का लौंग युक्त घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। गुलाब या आक के फूल अर्पित करें। गुग्गुल की धूप जलाकर 
सुन्दरकाण्ड
हनुमान चालीसा या बजरँग बाण के 108 पाठ करें।

(7) अबूझ मुहूर्त और अक्षय फलदायी होने के कारण विभिन तंत्रोक्त वस्तुओं के जागरण, पैन प्रतिष्ठा और स्थापना के लिए भी ये स्वर्णिम अवसर है।

(8) रुद्राक्ष और रुद्राक्ष माला, इन्द्राक्षी माला की प्राण प्रतिष्ठा और धारण करना भी महाफलदायि है।

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Wednesday, 15 April 2020

शास्त्रों में बताया है संक्रमण से बचने का तरीका

हम लोग खुद ही अंजान है अपनी संपदा से.......अपने शास्त्र के अर्थों से...... चिराग तले अँधेरा...✍️
*हिंदू धर्म में हजारों सालों से संक्रमण से बचने के लिए कुछ सूत्र जो अब पूरी दुनिया अपना रही है-*

*घ्राणास्ये वाससाच्छाद्य मलमूत्रं त्यजेत् बुध:।*(वाधूलस्मृति 9)
*नियम्य प्रयतो वाचं संवीताङ्गोऽवगुण्ठित:।*(मनुस्मृति 4/49))
नाक, मुंह तथा सिर को ढ़ककर, मौन रहकर मल मूत्र का त्याग करना चाहिए।

*तथा न अन्यधृतं धार्यम्* (महाभारत अनु.104/86)
दुसरों के पहने कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

*स्नानाचारविहीनस्य सर्वा:स्यु: निष्फला: क्रिया:*(वाधूलस्मृति 69)
स्नान और शुद्ध आचार के बिना सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं, अतः: सभी कार्य स्नान करके शुद्ध होकर करने चाहिए।

*लवणं व्यञ्जनं चैव घृतं तैलं तथैव च। लेह्यं पेयं च विविधं हस्तदत्तं न भक्षयेत्।*(धर्मसिंधु 3 पू.आह्निक)
नमक, घी, तैल, कोई भी व्यंजन, चाटने योग्य एवं पेय पदार्थ यदि हाथ से परोसे गए हों तो न खायें, चम्मच आदि से परोसने पर ही ग्राह्य हैं।

*न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयात्।*(विष्णुस्मृति 64)
पहने हुए वस्त्र को बिना धोए पुनः न पहनें। पहना हुआ वस्त्र धोकर ही पुनः पहनें।

*न चैव आर्द्राणि वासांसि नित्यं सेवेत मानव:।*(महाभारत अनु.104/52)
*न आर्द्रं परिदधीत*(गोभिलगृह्यसूत्र 3/5/24)
गीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
    ABC
*चिताधूमसेवने सर्वे वर्णा: स्नानम् आचरेयु:। वमने श्मश्रुकर्मणि कृते च*(विष्णुस्मृति 22)
श्मशान में जाने पर, वमन होने/करने पर, हजामत बनवाने पर स्नान करके शुद्ध होना चाहिए।

*हस्तपादे मुखे चैव पञ्चार्द्रो भोजनं चरेत्।*(पद्मपुराण सृष्टि 51/88)
*नाप्रक्षालित पाणिपादौ भुञ्जीत।*(सु.चि.24/98)
हाथ, पैर और मुंह धोकर भोजन करना चाहिए।

*अपमृज्यान्न च स्नातो गात्राण्यम्बरपाणिभि:।*(मार्कण्डेय पुराण 34/52)
स्नान करने के बाद अपने हाथों से या स्नान के समय पहने भीगे कपड़ों से शरीर को नहीं पोंछना चाहिए, अर्थात् किसी सूखे कपड़े (तौलिए) से ही पोंछना चाहिए।

*न वार्यञ्जलिना पिबेत्।*( मनुस्मृति 4/63)
*नाञ्जलिपुटेनाप: पिबेत्।*(सु.चि.24/98)
अंजलि से जल नहीं पीना चाहिए, किसी पात्र(गिलास) से जल पीयें।

*न धारयेत् परस्यैवं स्नानवस्त्रं कदाचन।*(पद्मपुराण सृष्टि 51/86)
दुसरों के स्नान के वस्त्र (तौलिए इत्यादि) प्रयोग में न लें।

*अब देख लीजिएआधुनिक अस्पताल और मेडिकल साइंस धराशाई हो चुके हैं और समस्त विश्व हजारों साल पुराने बचाव के उपाय अपना रहा है।*

अभिषेक पाण्डेय
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Tuesday, 7 April 2020

Hanuman jayanti 2020 हनुमान जयंती 2020 विशेष रोग नाशक मन्त्र

हनुमान जयंती विशेष ( रोग-कष्ट निवारक मन्त्र)

सभी मित्रों को श्री हनुमान जयंती की शुभकामनाएं

मित्रों,
हनुमान जयंती के अवसर पर और आप में से कई मित्रों के कहने पर हनुमानजी के 3 मन्त्र यहां दे रहा हूँ।
इसमें 2 शाबर मंत्र हैं, जिन्हें आप सिद्ध कर रोग, पीड़ा, बाधा नाश हेतु प्रयोग कर सकते हैं।

अपने और अपने परिवार जन के कल्याण हेतु, झाड़ा लगाने हेतु भी प्रयोग कर सकते हैं।

(1) भूत-प्रेतादि नाश एवं महामारी तथा समस्त अनिष्ट ग्रह-शान्ति के लिए 

ॐ ऐं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रौं हुं ॐ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत-पिशाच-ब्रह्म राक्षस-शाकिनी- डाकिनी-यक्षिणी-पूतना-मारीमहामारी-राक्षस-भैरव- बेताल ग्रह-राक्षसादिकान् क्षणेन हन हन भञ्जय भञ्जच मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामहेश्वर रुद्रावतार ॐ हूं फट् स्वाहा। ॐ नमो भगवते हनुमदाख्याय रुद्राय सर्वजनदुष्टजनमुखस्तम्भनं कुरु कुरु स्वाहा। ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं ठं ठं ठं फट् स्वाहा।

 विधि-मंगलवार को दिन भर व्रत रहकर हनुमानजी के मंदिर में यह मन्त्र सात हजार जप करने से सिद्ध हो जाता है। मन्त्र सिद्ध हो जाने के बाद हनुमान जी के समक्ष जप का दशांश हवन भी करना चाहिए।  उपरोक्त मंत्र भोजपत्र पर लाल चन्दन से लिखकर मन्त्र से अभिमन्त्रित कर ताबीज में भरकर धारण कर लेने से यह रामबाण सिद्ध होता है।


 (2) रोग-निवारक शाबर-मंत्र

 जै जै गुणवन्ती वीर हनुमान । रोग मिटे और खेल खिलाब । कारज पुरण करे पवन-सुत । जो न करे, तो मा अंजनी की दुहाई। शब्द साचा, पिण्ड काचा। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।

 विधि :  इस मंत्र को 11 माला जप कर सिद्ध करें। जपकाल में निरंतर उपले पर गुग्गुल अथवा लोबान की धूनी जाग्रत रखें।
प्रयोग :  तांबे के एक कलश में या बरतन में स्वच्छ जल रखे, उसमें चिरमी के तीन दाने डाले । उसको सामने रखकर उसके ऊपर हाथ रखकर उक्त मन्त्र १०८ बार जपे। बाद में चिरमी के दानों को निकालकर रोगी के मस्तक के ऊपर फिराकर दानों को दक्षिण दिशा की ओर फेंक दे । बरतन का जल रोगी को पिलाए । इस प्रकार प्रत्येक मङ्गलवार को करे रोगी को अतिशीघ्र शान्ति मिलेगी।

(3) श्री हनुमन्त पंजर शाबर स्तोत्र

ॐ हनुमन्ते नमः ॐमहावीर हनुमता । ॐ काल हैंकार  हनुमन्ता । ॐ रक्त हनुमन्ता । ॐ चल अञ्जनि-पुत्र ग्रह चल । हाक देत हांको कूदि । हनुमंत लङ्का जारि । पवन-पुत्र! अंजनी आनन्द-कारी राम दूत, हनुमंत ! खं-खं-खं । स्वं षट-ग्रह हं-हं-हं इंका
र-भाज-भाजी। शाकिनी-डाकिनी-भूत-प्रेत-पिशाच बन्ध-बन्ध । वीर हनुमंत ! ढाल बन्ध, तलवार-बन्ध, तपुक-बन्ध, नेजा-बन्ध, फरसा-बन्ध, बान-बन्ध, मोहक-बाण-बन्ध, चण्ड-बाण बन्ध रथ-बन्ध, पृथो-बन्ध, आकाश-बन्ध, पाताल-बन्ध फौज-बन्ध, कमर-बन्ध पत्थर-बन्ध अग्नि-बन्ध, वीर-बन्ध । हनुमान: न बांधो, तो माता अंजनी की दोहाई ।गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति फुरो मंत्र ईহवरी वाचा।

मन्त्र विधि:- इस मंत्र के 1000 जप कर गुड़ गुग्गुल से दशांश हवन कर सिद्ध कर लें।
जरूरत पड़ने पर आम या अनार की टहनी या मोरपंख से झाड़ें।
स्वयं की रक्षा हेतु 21 बार पढ़ कर शरीर पर हाथ फेर लें।

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Abhishek B. Pandey
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Wednesday, 1 April 2020

Ram Navmi special Raghavendra ashtkam Stotra राम नवमी विशेष राघवेंद्र अष्टकम

श्री राम जन्मोत्सव की शुभकामनाएं

॥ श्रीराघवेन्द्राष्टकम् ॥

अच्युतं राघवं जानकी वल्लभं
कोशलाधीश्वरं रामचन्द्रं हरिम् ।
नित्यधामाधिपं सद्गुणाम्भोनिधिं
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ १॥

सर्वसङ्कारकं सर्वसन्धारकं
सर्वसंहारकं सर्वसन्तारकम् ।
सर्वपं सर्वदं सर्वपूज्यं प्रभुं
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ २॥

देहिनं शेषिणं गामिनं रामिणं
ह्यस्य सर्वप्रपञ्चस्य चान्तःस्थितम् ।
विश्वपारस्थितं विश्वरूपं तथा
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ ३॥

सिन्धुना संस्तुतं सिन्धुसेतोः करं
रावणघ्नं परं रक्षसामन्तकम् ।
पह्नजादिस्तुतं सीतया चान्वितं
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ ४॥

योगिसिद्धाग्र-गण्यर्षि-सम्पूजितं
पह्नजोन्पादकं वेददं वेदपम् ।
वेदवेद्यं च सर्वज्ञहेतुं श्रुतेः
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ ५॥

दिव्यदेहं तथा दिव्यभूषान्वितं
नित्यमुक्तैकसेव्यं परेशं किलम् ।
कारणं कार्यरूपं विशिष्टं विभुं
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ ६॥

कुझ्तिऐः कुन्तलैःशोभमानं परं
दिव्यभव्जेक्षणं पूर्णचन्द्राननम् ।
नीलमेघद्युतिं दिव्यपीताम्बरं
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ ७॥

चापबाणान्वितं भुक्तिउक्तिप्रदं
धर्मसंरक्षकं पापविध्वंसकम् ।
दीनबन्धुं परेशं दयाम्भोनिधिं
सर्वलोकेश्वरं राघवेन्द्रं भजे ॥ ८॥

॥ इति श्रीराघवेन्द्राष्टकम् ॥

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Ek Shloki Durga एक श्लोकी दुर्गा

॥ एकश्लोकी दुर्गा ॥

ॐ दुं दुर्गायै नमः ।
या अम्बा मधुकैटभप्रमथिनी या माहिषोन्मूलिनी
या धूम्रेक्षण चन्डमुण्डमथिनी या रक्तबीजनाशिनी ।
शक्तिः शुम्भनिशुम्भदैत्यदलिनी या सिद्धलक्ष्मीः परा
सा दुर्गा नवकोटिशक्तिसहिता मां पातु विश्वेश्वरी ॥

।।जय श्री राम।।


Wednesday, 25 March 2020

विक्रम संवत 2077 राशिफल hindu new year horoscope

सभी मित्रों को विक्रम संवत 2077 नव सम्वत्सर की शुभकामनाएं

2077 का नव संवत्सर प्रमादी नाम से पुकारा और जाना जाएगा.
 इस वर्ष संवत के राजा बुध होंगे और मंत्री चंद्रमा होंगे.
 प्रमादी नामक संवत के प्रभाव से कृषी के क्षेत्र में विकास देखने को मिल सकता है. अनाज का अच्छा उत्पादन होगा. रस से भरपूर पदार्थों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है. गुड़ और चीनी जैसे मीठे पदार्थ भी महंगे होने लगेंगे.

आषाढ़ माह का समय कम वर्षा हो सकती है और भाद्रपद के महीने में अधिक बारिश होने की संभावना रहेगी.
इस नव संवत में राज और प्रजा के मध्य सामंजस्य की कमी के कारण सरकार की ओर से कुछ कठोर कानून भी लाए जा सकते हैं.
विरोधाभास की स्थिति बनी रहने वाली है. नियम एवं कानून में कठोरता और सख्ती के कारण क्रोध बढ़ सकता है.

जरुरी सामान महंगा हो सकती है. कुछ कारणों से , राजनीतिक उथल पुथल भी देखने को मिल सकती है. जातगत हिंसा भी बढ़ सकती है.

नव सम्वत्सर का स्थान इस वर्ष वैश्य के घर पर होने के कारण, व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्र में तेजी देखने को मिलेगी. मौसम में बदलाव दिखाई देगा. दूध जैसे पेय पदार्थ महंगे हो सकते हैं.
इस समय लोभ व स्वार्थ की स्थिति अधिक दिखाई देगी. व्यापारियों के लिए थोड़ा अधिक लाभ और बेहतर जीवन शैली दिखाई देगी.

देश के दक्षिण प्रांत में अव्यवस्था दिखाई दे सकती है. शासन परिवर्तन और राजनैतिक उतार-चढा़व दिखाई देते हैं. कहीं-कहीं अनाज की कमी भी देखने को मिल सकती है. इस समय लड़ाई झगड़े और एक दूसरे के प्रति असंतोष भी लोगों में बहुत अधिक होगा.

सम्वत राजा बुध

इस सम्वत वर्ष के राजा बुध होंगे. बुध के प्रभाव से शुभ एवं मांगलिक कार्यों का आयोजन बना रहेगा पर इसके साथ ही इसमें दूसरों के कारण परेशानी भी उत्पन्न की जा सकती हैं. मानसिक रुप से उत्सुकता और उत्साह की स्थिति अधिक दिखाई देती है. बड़े बुजुर्गों के साथ विरोधाभास भी अधिक रह सकता है. मनोरंजन के क्षेत्र में लोगों का झुकाव अधिक रहने वाला है. धन धान्य और सुख सुविधाओं के प्रति भी अधिक इच्छाएं होंगी.

बुध का प्रभाव लोगों के मध्य चालाकी से काम करने की प्रवृत्ति को बढ़ाने वाला होगा. एक दूसरे के साथ झूठ और छल करने की प्रवृत्ति भी बढ़ेगी. कला और संगीत के क्षेत्र में अधिक विकास होगा. व्यापारी वर्ग के लिए थोड़ा बेहतर समय होगा. साधु संतों का भी इस समय प्रभाव अधिक रहने वाला होगा. कानून विरोधी काम भी अधिक होंगे.

सम्वत मंत्री चंद्रमा

चंद्रमा के मंत्री होने के कारण भौतिक सुख सुविधाओं का बोलबाला होगा. लोगों का ध्यान भी इस ओर अधिक रह सकता है. वर्षा अच्छी होने की उम्मिद भी की जा सकती है. दूध और सफेद वस्तुओं का उत्पादन भी अच्छा होगा. रस और अनाज में वृद्धि होगी. बाजार में मूल्यों में उतार-चढा़व जल्दी दिखाई देगा. कोई भी स्थिति लम्बे समय तक नहीं रह पाए. असंतोष और दुविधा आम व्यक्ति के मन में बहुत अधिक रहने वाली है.

सस्येश (फसलों) का स्वामी गुरु

इस समय सस्येश गुरु का प्रभाव होने से रस और दूध और फलों की वृद्धि अच्छी होगी. इस समय वेद और धर्म के मार्ग पर जीवन जीने से लोगों का कल्याण होता है. कृषि के क्षेत्र में अच्छा रुख दिखाई दे सकता है. पशुओं से लाभ मिलने की उम्मीद भी दिखाई देती है. खेती से जुड़े व्यापारियों को भी लाभ मिलने की अच्छी उम्मिद दिखाई देती है.

धान्येश मंगल का प्रभाव

धान्येश अर्थात अनाज और धान्य जो हैं उनके स्वामी मंगल होंगे. मंगल के प्रभाव से चना, सरसों बाजरा के मूल्य में वृद्धि देखने को मिल सकती है. तेल जैसे पदार्थों में तेजी आएगी ये वस्तुएं महंगी हो सकती है.

मेघेश सूर्य का प्रभाव

मेघेश यानी के वर्षा का स्वामी. इस वर्ष सूर्य मेघेश होंगे. सूर्य के प्रभाव गेहूं, जौ, चने, बाजरा की पैदावार अच्छी होगी. दूध, गुड़ भी अच्छे होंगे, उत्पादन में वृद्धि होगी. सूर्य का प्रभाव कई स्थानों पर वर्षा में कमी ला सकता है. नदी और तालाब जल्द सूख भी सकते हैं.

रसेश शनि का प्रभाव

रसेश अर्थात रसों का स्वामी, रस का स्वामी शनि होने के कारण भूमी का जलस्तर कम हो सकता है. वर्षा होने पर भी जल का संचय भूमि पर नहीं हो पाए. बेमौसमी और प्रतिकूल वर्षा के कारण अनेक रोग उत्पन्न हो सकते हैं. कुछ ऎसे रोग भी बढ़ सकते हैं जो लम्बे चलें और आसानी से ठीक न हो पाएं.

नीरसेश गुरु का प्रभाव

नीरसेश अर्थात ठोस धातुओं का स्वामी. इनका स्वामी गुरु है. गुरु के प्रभाव से तांबा, सोना या अन्य पीले रंग की वस्तुओं के प्रति लोगों का झुकाव और अधिक बढ़ सकता है. इनकी मांग बढ़ सकती है.

फलेश सूर्य का प्रभाव

फलेश अर्थात फलों का स्वामी. सूर्य के फलों का स्वामी होने के कारण इस समय वृक्षों पर फल बहुत अच्छी मात्रा में रहेंगे. फल और फूलों की अच्छी पैदावार भी होगी ओर उत्पादन भी बढ़ेगा. पर कुछ स्थान पर इसमें विरोधाभास भी दिखाई देगा जैसे की कही अच्छा होना और कहीं अचानक से कम हो जाना.

धनेश बुध का प्रभाव

धनेश अर्थात धन का स्वामी राज्य के कोश का स्वामी. बुध के धनेश होने के कारण वस्तुओं का संग्रह अच्छे से हो सकता है. व्यापार से भी लाभ मिलेगा और सरकारी खजाने में धन आएगा. धार्मिक कार्य कलापों से भी धन की अच्छी प्राप्ति होगी.

दुर्गेश सूर्य का प्रभाव

दुर्गेश अर्थात सेना का स्वामी. सूर्य के दुर्गेश होने से सैन्य कार्य अच्छे से हो सकेंगे. न्याय पालन करने में लोगों का असहयोग रहेगा. पर कई मामलों में कुछ लोग निड़र होकर कई प्रकार के खतरनाक हथियारों का निर्माण करने में भी लगे रह सकते हैं. सरकारी तंत्र से जुड़े लोग नियमों को अधिक न मानें अपनी मन मर्जी ज्यादा कर सकते हैं.

राशि अनुसार वर्षफल

मेष
मेष राशि के जातकों को जमीन से जुड़े मामलों में इस दौरान फायदा होगा आप प्रॉपर्टी खरीद के या बेचकर इस वर्ष लाभ कमा सकते हैं। इसके साथ ही आपके लाइफ स्टाइल और सामाजिक स्तर में भी सुधार आएगा। आपकी चंद्र राशि के स्वामी मंगल की उच्च स्थिति के कारण करियर के क्षेत्र में बड़े बदलाव आने की संभावना है। आप कार्यक्षेत्र में उच्च पद पाने में इस साल कामयाब हो सकते हैं। हालांकि जल्दबाजी और आक्रामकता से इस दौरान आपको बचकर रहना चाहिए।

वृषभ

नया हिंदू नववर्ष वृषभ राशि के उन जातकों के लिए  शुभ साबित होगा जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों काम कर रहे हैं या विदेशों में बसना चाहते हैं, क्योंकि आपकी चंद्र राशि का स्वामी शुक्र इस दौरान द्वादश भाव में विराजमान रहेगा और यह भाव विदेशी मामलों के बारे में दर्शाता है। ग्रहों की स्थिति इंगित कर रही है कि इस दौरान आपके प्रयास सही दिशा में जाएंगे और आपको नाम पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। इस दौरान आपको ई-मेल या इंटरनेट के किसी स्रोत के द्वारा खुशखबरी मिल सकती है। हालांकि स्वास्थ्य का ध्यान रखना इस दौरान आपके लिए बहुत जरुरी होगा। इस दौरान रचनात्मक कार्य करना भी आपके लिए शुभ रहेगा।

मिथुन

ग्रहों की स्थिति बताती है कि इस साल आपको भाग्य का पूरा सहयोग प्राप्त होगा क्योंकि आपकी चंद्र राशि का स्वामी बुध आपके भाग्य के नवम भाव में विराजमान है। इस समय आप धार्मिक यात्राओं पर भी जा सकते हैं। इस राशि के जातकों को कई अच्छे अवसर इस दौरान प्राप्त हो सकते हैं जिनसे इनकी आमदनी दोगनी होने की संभावना है। इस साल आप अपनी ऊर्जा को निवेश और बचत में लगा सकते हैं, इन कामों के लिए यह साल अच्छा है इससे आपके परिवार का भविष्य भी सुधरेगा। हालांकि आपके रिश्तों में कुछ उतार चढ़ाव इस दौरान देखने को मिल सकता है, इसलिए अपने प्रियजनों के साथ आपको बातचीत करनी चाहिए।

कर्क

कर्क राशि के जातकों को अतीत में किये गये कामों का अच्छा फल इस साल मिल सकता है क्योंकि उनकी राशि का स्वामी चंद्रमा उनके भाग्य भाव में विराजमान है। दशम भाव के स्वामी मंगल की उच्च स्थिति दर्शाती है कि आप अपने कार्यों को सही तरीके से अनजाम दे पाएंगे। इस राशि के कुछ जातकों को उपहार मिल सकते हैं वहीं कुछ जातकों की आमदनी में वृद्धि भी हो सकती है। इस राशि के कारोबारियों को भी लाभ होगा। कर्क राशि के जातकों के घर में कोई मांगिलक कार्य भी इस साल हो सकता है

सिंह

सिंह राशि के जातकों को इस वर्ष अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा नहीं तो अपने कमाई का अधिकतर हिस्सा आप सेहत पर ही खर्च कर सकते हैं। इस साल आपको कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए, कोई भी फैसला लेने से पहले फायदे नुक्सान के बारे में जरुर सोच लें नहीं तो घाटे में आ सकते हैं। अपने गुरुजनों या घर के बड़ों से सलाह मशवरा करना आपके लिए सही रहेगा इससे धन की हानि करने से बच सकते हैं। आशावादी और सामाजिक बने रहें इससे आपको सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

कन्या

ग्रहों की स्थिति से पता चलता है कि यह साल आपके लिए सफलतादायक रहेगा और आर्थिक रुप से फायदे में रहेंगे। इसके साथ ही इस राशि के लोगों को सम्मान और प्रशंसा की प्राप्ति होगी। आपकी चंद्र राशि के स्वामी बुध की स्थिति से पता चलता है कि इस राशि के पेशेवर लोगों को अपने पसंदीदा क्षेत्रों में इस दौरान अवसरों की प्राप्ति होगी। वहीं कारोबारियों को भी अच्छा लाभ होने की संभावना है। हालांकि आपमें थोड़ा जिद्दीपना इस साल देखा जा सकता है जिससे रिश्तों में दिक्कतें आ सकती हैं। विवाहित लोगों के जीवन में कोई मांगलिक कार्य इस दौरान हो सकता है।

तुला

इस साल ग्रहों की स्थिति से आपका कर्म भाव जिससे आपके करियर के बारे में भी पता चलता है सक्रिय अवस्था में रहेगा, इससे पता चलता है कि कार्यक्षेत्र में इस समय आपको शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। आपकी चंद्र राशि के स्वामी ग्रह शुक्र का साझेदारी के भाव में होना रिश्तों में नयी ऊर्जा भरेगा। इस दौरान आपका स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा रहने की उम्मीदे है। हालांकि आपके चतुर्थ भाव में दो क्रूर ग्रहों की स्थिति आपकी माता को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दे सकती है, जिससे घर के माहौल में भी असर पड़ेगा।

वृश्चिक

आपकी चंद्र राशि का स्वामी मंगल उच्च अवस्था में है इससे पता चलता है कि आप जीवन की परेशानियों और मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकल सकते हैं। आपकी आत्मशक्ति में इस साल वृद्धि हो सकती है। नये साल की कुंडली की लग्न राशि आपके भाग्य के घर को सक्रिय कर देगी जिससे पता चलता है कि इस राशि के नौकरी पेशा लोगों की आमदनी में वृद्धि हो सकती है और आपके नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं। इस राशि के कारोबारियों का कारोबार भी इस वर्ष फलेगा। हालांकि आपको कोई भी ऐसा वादा करने से बचना चाहिए जिसे आप निभा नहीं सकते, नहीं तो आपकी छवि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ज्ञान प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी यह साल अच्छा रहेगा।

धनु

नये वर्ष की लग्न राशि कर्क का अनिश्चितता के अष्टम भाव में होना दर्शाता है कि आपमें असुरक्षा और चिंता की भावना बढ़ सकती है जिसके कारण आपके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि आपकी चंद्र राशि के स्वामी गुरु का आपके लग्न भाव में होना आपके लिए थोड़ा सुकूनदायक रहेगा। आपके द्वितीय भाव के स्वामी शनि का अपने घर में होना आपके लिए अच्छा रहेगा इससे आपकी आर्थिक उन्नति होगी, लेकिन धन की बचत करने में कुछ मुश्किलें आपको आ सकती हैं। आपके वाणी की कठोरता पारिवारिक जीवन में दिक्कत पैदा कर सकती है, इसलिए बातचीत के दौरान शब्दों को सोच समझकर इस्तेमाल करें।

मकर

नव वर्ष में मकर राशि के जातक नए रिश्ते और नए कारोबारी संबंध बना सकते हैं क्योंकि नव वर्ष की लग्न राशि कर्क आपके सप्तम भाव में होगी। इस भाव से आपकी साझेदारियों के बारे में पता चलता है। इस दौरान यात्राएं करना आपके लिए सफलतादायक रहेगा। हालांकि मंगल और शनि की आपके लग्न भाव में स्थिति आपको आक्रामक बना सकती है और अपने कार्यों के लिए प्रशंसा प्राप्त करना चाहेंगे जो आपकी ऊर्जा को वेस्ट करने वाला साबित होगा। शारीरिक क्रियाएं जैसे व्यायाम करना आपकी ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए फायदेमंद होगा।

कुंभ

कुंभ राशि के जातकों के लिए नए साल की लग्न राशि कर्क की स्थिति उनके षष्ठम भाव में होगी जिसके कारण आपके शत्रुओं की संख्या में वृद्धि हो सकती है और और आपके ऊपर उधार बढ़ सकता है। अपने खर्चों को लेकर इस दौरान सावधान रहें और आमदनी और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करें। स्वास्थ्य को लेकर आपको कुछ दिक्कतों का सामना इस दौरान करना पड़ सकता है, दुर्घटना होने की भी संभावना है इसलिए संभलकर रहें। सामाजिक बने रहें, दोस्तों से मिलते जुलते रहें क्योंकि आखिर वो ही आपके काम आएंगे। इस राशि के जो लोग विदेशों में बसना चाहते हैं उन्हें इस दौरान सफलता मिल सकती है।

मीन

मीन राशि के जातकों के परिवार में किसी नए सदस्य की एंट्री हो सकती है क्योंकि नए वर्ष की लग्न राशि आपके पंचम भाव में है, पंचम भाव से संतान प्रेम और रोमांस के बारे में पता चलता है। इस राशि के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में भी इस दौरान सफलता मिलेगी। इस राशि के पेशेवर लोगों को उनके विचारों के लिए सम्मान मिल सकता है, इस राशि के कारोबारियों को भी उनकी योजनाओं से लाभ होने की संभावना है। इस राशि के जो जातक सिंगल हैं वो किसी खास से इस दौरान मिल सकते हैं, विवाहित जातकों के जीवन में प्यार और संतुलन बना रहेगा। आपके द्वितीय भाव के स्वामी मंगल और एकादश भाव के स्वामी शनि की युति आपको सफलता और लाभ दिलाएगी। आपकी अधूरी इच्छाएं भी इस वर्ष पूरी हो सकती हैं।

अन्य किसी प्रकार की जानकारी , उपाय, कुंडली विश्लेषण एवं समस्या समाधान हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।
Abhishek B. Pandey
नैनीताल, उत्तराखण्ड

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Monday, 9 March 2020

Holi special Utara for removal of all problems होली विशेष सर्वबाधा निवारण उतारा


होली पर विशेष उतारा

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25 विभिन्न सामग्रियों और 3 विशेष गंडो से युक्त

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Tuesday, 14 January 2020

मकर संक्रान्ति 2020 विशेष Makar sankranti 2020

मकर संक्रान्ति / उत्तरायण पर्व विशेष
 (स्नान, दान और योग का पर्व)

=◆ तिल-गुड़ का दान ब्राह्मण को अवश्य दें,
उड़द, खिचड़ी, तिल गुड़, घी कम्बल आदि जरूरतमंद को।

सुख, शान्ति एवं समृध्दि की मंगलकामनाओं सहित आप सभी को मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ।

सूर्य जिस राशि पर स्थित हो, उसे छोड़कर जब दूसरी राशि में प्रवेश करे, उस समय का नाम संक्रान्ति है।

सूर्य बारह स्वरूप धारण करके बारह महीनों में बारह राशियों में संक्रमण करते रहते हैं; उनके संक्रमण से ही संक्रान्ति होती है। इस तरह वर्ष में बारह संक्रान्ति होती हैं किन्तु सबसे ज्यादा महत्व मकर-संक्रान्ति का है।

मकर-संक्रान्ति है देवताओं का प्रभातकाल।

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ‘मकर-संक्रान्ति’ कहलाता है। इस दिन सूर्य अपनी कक्षाओं में परिवर्तन कर दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं।

 उत्तरायण को ‘देवताओं का दिन’ व दक्षिणायन को ‘देवताओं की रात’ कहा गया है। इस तरह मकर-संक्रान्ति देवताओं का प्रभातकाल है। इसको अंधकार से प्रकाश की ओर हुआ परिवर्तन माना जाता है।

मकर-संक्रान्ति से दिन बढ़ने लगता है और रात छोटी होने लगती है। इससे प्रकाश अधिक व अंधकार कम होने लगता है फलस्वरूप प्राणियों की चेतनता और कार्यक्षमता में वृद्धि होने लगती है।

मकर-संक्रान्ति पर गंगास्नान का महत्त्व?

माघ मकरगत रबि जब होई।
 तीरथपतिहिं आव सब कोई।।

ऐसा माना जाता है कि मकर-संक्रान्ति के दिन गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर प्रयाग में सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं; इसलिए मकर-संक्रान्ति के दिन गंगास्नान या नदियों में स्नान को अत्यन्त पुण्यदायी माना गया है।

मकर-संक्रान्ति के दिन दान का फल अक्षय होता है?

मकर संक्रान्ति में किए गए स्नान, तर्पण, दान और पूजन का फल अक्षय होता है। इससे मनुष्य सभी प्रकार के भोगों के साथ मोक्ष को प्राप्त होता है।

 सूर्यनारायण का पूजन कर व्रत करने से सब प्रकार के पापों का नाश, आधि-व्याधि का नाश व सब प्रकार की हीनता और संकोच का अंत हो जाता है, साथ ही सुख-संपत्ति, संतान व सहानुभूति की प्राप्ति होती है।

संक्रान्तिकाल में ‘ॐ सूर्याय नम:’ या ‘ॐ नमो भगवते सूर्याय’ का जप और आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करना चाहिए। घी, बूरा व मेवा मिले तिलों से हवन कर अन्न-वस्त्र का दान देना चाहिए। संक्रान्ति को रात्रि में स्नान व दान नहीं करना चाहिए।

सूर्य स्तवराज स्तोत्र :

 सूर्य की स्तुति तो सभी करते हैं। लेकिन भगवान सूर्य का एक ऐसा कल्याणमय स्तोत्र, जो सब स्तुतियों का सारभूत है। जो भगवान भास्कर के पवित्र, शुभ एवं गोपनीय नाम हैं।

विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रविः।
लोक प्रकाशकः श्री माँल्लोक चक्षुर्मुहेश्वरः॥
लोकसाक्षी त्रिलोकेशः कर्ता हर्ता तमिस्रहा।
तपनस्तापनश्चैव शुचिः सप्ताश्ववाहनः॥
गभस्तिहस्तो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृतः।
एकविंशतिरित्येष स्तव इष्टः सदा रवेः॥

'विकर्तन, विवस्वान, मार्तण्ड, भास्कर, रवि, लोकप्रकाशक, श्रीमान, लोकचक्षु, महेश्वर, लोकसाक्षी, त्रिलोकेश, कर्ता, हर्त्ता, तमिस्राहा, तपन, तापन, शुचि, सप्ताश्ववाहन, गभस्तिहस्त, ब्रह्मा और सर्वदेव नमस्कृत- इस प्रकार 21 नामों का यह स्तोत्र भगवान सूर्य को सदा प्रिय है।' (ब्रह्म पुराण : 31.31-33)

यह शरीर को निरोग बनाने वाला, धन की वृद्धि करने वाला और यश फैलाने वाला स्तोत्रराज है। इसकी तीनों लोकों में प्रसिद्धि है। जो सूर्य के उदय और अस्तकाल में दोनों संध्याओं के समय इस स्तोत्र के द्वारा भगवान सूर्य की स्तुति करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है।

धन की प्राप्ति के लिए धनसंक्रान्ति व्रत

संक्रान्ति के दिन एक कलश में जल भरकर सर्वोषधि डाल दें, साथ में फल व दक्षिणा रखकर रोली चावल से कलश का पूजन करें। सूर्यभगवान को अर्घ्य अर्पित कर एक समय भोजन करें। कलश ब्राह्मण को दे दें। एक वर्ष तक इस तरह हर संक्रान्ति को व्रत व पूजन करने से मनुष्य को कभी धन की कमी नहीं रहती है।

भोगों की प्राप्ति के लिए भोगसंक्रान्ति व्रत

संक्रान्ति के दिन ब्राह्मण-दम्पत्ति को बुलाकर भोजन कराएं व श्रृंगार सामग्री, पान, पुष्पमाला, फल व दक्षिणा देने से मनुष्य को मनचाहे भोगों की प्राप्ति होती है।

रूप की प्राप्ति के लिए रूपसंक्रान्ति व्रत

रूप-सौन्दर्य की इच्छा रखने वाले मनुष्य को संक्रान्ति के दिन तेलमालिश के बाद स्नान करना चाहिए। फिर एक पात्र में घी व सोना रखकर उसमें अपनी छाया देखकर ब्राह्मण को दान दें व व्रत करें तो रूपसौन्दर्य की वृद्धि होती है।

तेज की प्राप्ति के लिए तेजसंक्रान्ति व्रत

संक्रान्ति के समय एक कलश में चावल भरकर उस पर घी का दीपक रखें। उसके समीप में मोदक रखकर गंध-पुष्प से पूजन कर यह बोलते हुए जल छोड़ दें कि मैं अपने पापों के नाश के लिए व तेज की प्राप्ति के लिए इस पूर्णपात्र का ब्राह्मण को दान करता हूँ। ऐसा करने से मनुष्य के तेज में वृद्धि होती है।

आयु की प्राप्ति के लिए आयुसंक्रान्ति व्रत

संक्रान्ति के समय एक कांसे की थाली में घी, दूध व सोना रखकर रोली चावल से पूजन कर ब्राह्मण को दान दें तो तेज, आयु और आरोग्य की वृद्धि होती है।

भगवान सूर्य का संक्रान्तिकाल है परम फलदायी

—धन, मिथुन, मीन और कन्या राशि की संक्रान्ति को षडरीति कहते हैं। इस संक्रान्ति में किए गए पुण्यकर्मों  का फल हजारगुना होता है।

—वृष, वृश्चिक, कुम्भ और सिंह राशि पर जो सूर्य की संक्रान्ति होती है, उसका नाम विष्णुपदी है। इस संक्रान्ति में किए गए पुण्यकर्मों  का फल लाखगुना होता है।

—तुला और मेष राशि पर जो सूर्य की संक्रान्ति होती है, उसका नाम विषुवती है। इसमें दिए गए दान का फल अनन्तगुना होता है।

—उत्तरायण और दक्षिणायन आरम्भ होने के दिन किए गए सत्कर्मों का कोटिगुना अधिक फल प्राप्त होता है।

वर्षभर की बारह संक्रान्ति में दिए जाने वाले दान

१. मेष संक्रान्ति में मेढ़ा (नर भेड़) का दान
२. वृष संक्रान्ति में गौ का दान
३. मिथुन संक्रान्ति में अन्न-वस्त्र और दूध-दही का दान
४. कर्क संक्रान्ति में गाय
५. सिंह संक्रान्ति में सोना, छाता आदि
६. कन्या संक्रान्ति में वस्त्र और गाय
७. तुला संक्रान्ति में जौ, गेहूं, चना आदि धान्य
८. वृश्चिक संक्रान्ति में मकान, झौंपड़ी आदि
९. धनु संक्रान्ति में वस्त्र और सवारी
१०. मकर संक्रान्ति में लकड़ी, घी, ऊनी वस्त्र
११. कुम्भ में गायों के लिए घास और जल
१२. मीन में सुगन्धित तेल और पुष्प का दान करना चाहिए।

इस प्रकार संक्रान्ति के अवसर पर जो कुछ दान किया जाता है, भगवान सूर्यनारायण उसे जन्म-जन्मान्तर तक प्रदान कर सब प्रकार की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

अन्य किसी जानकारी, समस्या समाधान और कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।

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