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Sunday, 15 February 2015

Indrajal Mahaindrajal इंद्रजाल महाइन्द्रजाल ( The Tantrik Herbs -9 )

तंत्र में अति प्रचलित कुछ वस्तुएं

Indrajal  Maha Indrajaal
इंद्रजाल या महा इंद्रजाल :

मित्रों
इंद्रजाल एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही शरीर में एक रोमांच पैदा हो जाता है। प्राचीनकाल में तंत्र , जादू, काला जादू, भ्रम और रहस्यमय विद्या के लिए इंद्रजाल शब्द प्रयुक्त होता था।

आज हम बात कर रहे हैं इंद्रजाल नामक वनस्पति की। अपने नाम के अनुरूप ही ये भी बेहद जादुई और रहस्यमयी है। बेचने वाले कहते हैं इंद्रजाल सफेद लाल और पीला तीन रंग का आता है जो गलत है या कहिये उन्हें इससे अधिक पता ही नहीं है वो सिर्फ सुनी सुनाई बातें बता रहे हैं।

इंद्रजाल एक वनस्पति है जो समुद्रों में शैवालों मूंगे की चट्टानों और समुद्र की तलहटी में बेहद गहराई में पायी जाती है।

"ये डेढ़ दर्जन से अधिक रंगों में पायी जाती है और दुनिया भर के समुद्रों में इसकी 500 से अधिक् प्रजातियां अभी तक ज्ञात हैं। "

इसका आकार शिराओं की भांति लहरदार लकीरों के रूप में होता है।  प्रजाति के अनुरूप
कुछ में शिराओं के मध्य समस्त स्थान खाली रहता है तो कुछ की शिराओं में रोयेंदार भराव भी होता है।

इसे रखने का सबसे अच्छा तरीका है इसे फ्रेम करवाकर रखना जिससे ये सुरक्षित भी रहता है और प्रभाव में कोई कमी नहीं आती।

ये लक्ष्मी और भौतिक सुख प्रदान करने वाला माना जाता है। भारत में जहां इसे तंत्र से जोड़कर देखते हैं वहीँ पश्चिम में ये मात्र सजावट की वस्तु है पर बेहद महंगी।
मिस्र में इसे सुख समृद्धि और उन्नति का प्रतिक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार-

सिद्ध इंद्रजाल को अपने पास रखने से नजरदोष, ऊपरी बाधा, नकारात्मक शक्तियों और जादू टोने का प्रभाव  आदि का प्रभाव क्षीण होता है।

यह प्रबल आकर्षण शक्ति संपन्न है।

अभिमन्त्रित कर ताबीज़ में भर कर धारण करने से सर्वजन पर वशीकरण प्रभाव होता है।

रवि पुष्य नक्षत्र, नवरात्र, होली दीपावली इत्यादि शुभ समय में मंत्रों से इंद्रजाल वनस्पति को मंत्रों से अभिमंत्रित कर साधक अपने कर्मक्षेत्र में और अध्यात्मिक क्षेत्र में लाभ प्राप्त कर सकता है।

घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियों भूत प्रेत आदि का प्रवेश नहीं होता । वास्तु दोषों का नाश होता है।

रोगी व्यक्ति के दक्षिण दिशा में लगाने से मृत्यु भय नहीं होता और उत्तर में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है।

दुकान व्यापार स्थल के दक्षिण दिशा में लगाने से व्यापार में उन्नति होती है और दुश्मनों प्रतिद्वंदियों द्वारा किये कराये के असर से बचाव होता है।

तंत्र में जहां एक ओर ये सुरक्षा करता है वहीँ दूसरी ओर इसके घातक प्रयोग भी है जैसे शत्रु को मतिमूढ़ यानि पागल करना, गम्भीर त्वचा रोग लगा देना और रक्त दोष उतपन्न करना।

वही चिकित्सा के क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा में ये जीवन दायिनी भी है। अन्य वनस्पति यौगिकों के साथ मिलाकर ये लीवर के गम्भीर रोगों और पुरुषों के प्रोस्टेट समस्या और कैंसर के लिये अतिउपयोगी औषधि भी है।

अधिक जानकारी समस्या समाधान एवम् कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।
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