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Sunday, 1 February 2026

ललिता जयंती 2026


श्री विद्या माँ राजराजेश्वरी ललिता त्रिपुरसुंदरी मन्त्र 
Ma Lalita Tripur sundari mantra

सभी मित्रों को माघ पूर्णिमा, राजराजेश्वरी माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी जयंती की शुभकामनायें।

माँ ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं. ललिता जयंती का व्रत भक्तजनों के लिए बहुत ही फलदायक होता है. ऐसी मान्यता है कि यदि कोई इस दिन मां ललिता देवी की पूजा भक्ति-भाव सहित करता है तो उसे देवी मां की कृपा अवश्य प्राप्त होती है और जीवन में हमेशा सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

श्री ललिता जयंती कथा

देवी ललिता आदि शक्ति का वर्णन देवी पुराण में प्राप्त होता है. जिसके अनुसार पिता दक्ष द्वारा अपमान से आहत होकर जब दक्ष पुत्री सती ने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये तो सती के वियोग में भगवान शिव उनका पार्थिव शव अपने कंधों में उठाए चारों दिशाओं में घूमने लगते हैं. इस महाविपत्ति को यह देख भगवान विष्णु चक्र द्वारा सती के शव के 108 भागों में विभाजित कर देते हैं. इस प्रकार शव के टूकडे़ होने पर सती के शव के अंश जहां गिरे वहीं शक्तिपीठ की स्थापना हुई. उसी में एक माँ ललिता का स्थान भी है. भगवान शंकर को हृदय में धारण करने पर सती नैमिष में लिंगधारिणीनाम से विख्यात हुईं इन्हें ललिता देवी के नाम से पुकारा जाने लगा.

एक अन्य कथा अनुसार ललिता देवी का प्रादुर्भाव तब होता है जब ब्रह्मा जी द्वारा छोडे गये चक्र से पाताल समाप्त होने लगा. इस स्थिति से विचलित होकर ऋषि-मुनि भी घबरा जाते हैं, और संपूर्ण पृथ्वी धीरे-धीरे जलमग्न होने लगती है. तब सभी ऋषि माता ललिता देवी की उपासना करने लगते हैं. उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर देवी जी प्रकट होती हैं तथा इस विनाशकारी चक्र को थाम लेती हैं. सृष्टि पुन: नवजीवन को पाती है.

श्री ललिता जयंती महत्व

मां ललिता देवी मंदिर में हमेशा ही भक्तों का तांता लगा रहता है, परन्तु जयंती के अवसर पर मां की पूजा-आराधना का कुछ विशेष ही महत्व होता है.

यह पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यतानुसार इस दिन देवी ललिता भांडा नामक राक्षस को मारने के लिए अवतार लेती हैं. राक्षस भांडा कामदेव के शरीर के राख से उत्पन्न होता है. इस दिन भक्तगण षोडषोपचार विधि से मां ललिता का पूजन करते है. इस दिन मां ललिता के साथ साथ स्कंदमाता और शिव शंकर की भी शास्त्रानुसार पूजा की जाती है.

श्री ललिता पूजा -

देवी ललिता जी का ध्यान रुप बहुत ही उज्जवल व प्रकाश मान है.
माँ की पूजा तीन स्वरूपों में होती है
1. बाल सुंदरी- 8 वर्षीया कन्या रूप में

2. षोडशी त्रिपुर सुंदरी - 16 वर्षीया सुंदरी

3. ललिता त्रिपुर सुंदरी- युवा स्वरूप

माँ की दीक्षा और साधना भी इसी क्रम में करनी चाहिए। ऐसा देखा गया है की सीधे ललिता स्वरूप की साधना करने पर साधक को शुरू में कई बार आर्थिक संकट भी आते हैं और फिर धीरे धीरे साधना बढ़ने पर लाभ होता है।

बृहन्नीला तंत्र के अनुसार काली के दो भेद कहे गए हैं कृष्ण वर्ण और रक्त वर्ण।

कृष्ण वर्ण काली दक्षिणकालिका स्वरुप है और
रक्त वर्ण त्रिपुर सुंदरी स्वरुप।

अर्थात माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी रक्त काली स्वरूपा हैं।

महा विद्याओं में कोई स्वरुप भोग देने में प्रधान है तो कोई स्वरूप मोक्ष देने में परंतु त्रिपुरसुंदरी अपने साधक को दोनों ही देती हैं।

शुक्ल पक्ष के समय प्रात:काल माता की पूजा उपासना करनी चाहिए. कालिकापुराण के अनुसार देवी की दो भुजाएं हैं, यह गौर वर्ण की, रक्तिम कमल पर विराजित हैं.

ललिता देवी की पूजा से समृद्धि की प्राप्त होती है. दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को चण्डी का स्थान प्राप्त है. इनकी पूजा पद्धति देवी चण्डी के समान ही है।

ये श्री यंत्र की मूल अधिष्ठात्री देवी हैं। आज श्री यंत्र को पंचामृत से स्नान करवा कर यथोचित पूजन और ललिता सहस्त्रनाम, ललिता त्रिशति ललितोपाख्यान और श्री सूक्त का पाठ करें।

ध्यान:-

बालार्क युत तैजसं त्रिनयनां रक्ताम्बरोल्लसिनीं।
नानालंकृतिराजमानवपुषं बालोडुराट शेखराम्।।
हस्तैरिक्षु धनुः सृणि सुमशरं पाशं मुदा विभ्रतीं।
श्री चक्र स्थितःसुन्दरीं त्रिजगतधारभूतां भजे।।

इस ध्यान मन्त्र से माँ को रक्त पुष्प , वस्त्र आदि चढ़ाकर अधिकाधिक जप करें। आपकी आर्थिक भौतिक समस्याएं समाप्त होंगी।

मन्त्र:-

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नमः।

ये मंत्र सिर्फ जानकारी के लिए दिया है, बिना दीक्षा बिल्कुल न करें।

माँ ललिताम्बा सबका कल्याण करें।

आज मंगलवार- रवि पुष्य नक्षत्र-पूर्णिमा का भी दुर्लभ संयोग है।
आज के दिन ललिता यंत्र, षोडशी यंत्र या श्री यंत्र का पूजन भी अत्यधिक फलदाई होता है।

आज के दिन श्री हनुमान जी का पूजन, चोला चढ़ाना , चालीस पाठ मन्त्र जप आदि भी बहुत शुभफलप्रद है।
मंगलदोष के निवारण और मंगल जनित रोगों पीड़ाओं के शमन के लिए भी आज का दिन अतिशुभ है।

अधिक जानकारी, समस्या समाधान, कुंडली विश्लेषण और विभिन्न प्राणप्रतिष्ठित तंत्रोक्त वस्तुओं हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।
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Saturday, 27 December 2025

शाक्मभरी अष्टमी विशेष उपाय

सुख -समृद्धि और हानि रोकने का उपाय

दोस्तों, 
साल के अंतिम पड़ाव में बहुत ही सुंदर और सरल उपाय है, जिसके करने से आप अपना अगला वर्ष सफल बना सकते हैं,  मनोकामना की पूर्ति कर सकते हैं और भय, दुर्घटना, चोरी आदि से बचाव कर सकते हैं।

इसके लिए आज शाम को सूर्यास्त से रात्रि तक जब भी समय मिले ये दोनों उपाय कर लीजिए।

ये उपाय आज करिए और फिर पूर्णिमा यानि 3 जनवरी 2026 को पुनः करिए। 
मात्र 2 बार के करने में ही आपको अद्भुद लाभ होगा।

आज पौष मास शुक्ल पक्ष अष्टमी है और आज से शाकंभरी नवरात्रि शुरू हो रही है जो पूर्णिमा तक चलेगी।

इसके लिए आज शाम पहले अपने घर के मंदिर में ही पहले माता शाकंभरी का पूजन करें।
दुर्गा माता की मूर्ति या फोटो को भी माता शाकंभरी के रूप में पूज सकते हैं।
सबसे पहले देवी का कुमकुम अक्षत, दीप, धूप, फूल आदि ए पूजन करें। घी और तेल दोनो ही दीपक जलाएं।
फिर नीचे लिखे मंत्र से एक एक कर देवी को सब्जी और फल  भोग के रूप में अर्पित करें।

ॐ शाकंभरी नील वर्णा नीलोत्पल विलोचना।
 मुष्टिं शिली मुखा पूर्ण कमलं कमलालया॥: 

(लौकी, कद्दू, पेठा, शकरकंद और कोई हरी साग सब्जी, साथ ही जो भी फल उपलब्ध हों केला पपीता संतरा सेब आदि)

हर चीज़ अर्पित करते हुए ऊपर दिए मंत्र को एक बार अवश्य पढ़ें

उसके बाद एक पान के पत्ते पर सिंदूर से एक उल्टा त्रिकोण बनाएं और उसके बीच में एक बिंदी लगाएं, उसके ऊपर एक तेल का दीपक जलाएं और पांच बताशे और पांच लौंग रखें।
फिर नीचे दिए मंत्र का यथासंभव अधिकाधिक जप करें।

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति शाकंभरी देव्यै नमः॥
या
ॐ सौः क्लीं ह्रीं शाकम्भर्यै नमः ॐ।।
 
इसके बाद घर के पास किसी पीपल के पेड़ के नीचे यदि पेड़ चौराहे या मन्दिर पे हो तो और भी अच्छा।

एक पान के पत्ते पे सीधा त्रिकोण बनाएं, बीच में बिंदी लगाएं और इस पर भी तेल का दीपक जलाएं, 5 बताशे और 5 लौंग रखें, फिर मंत्र जप करें

ॐ काल भैरवाय नमः 
ॐ कुल भैरवाय नमः 
ॐ क्षेत्रपाल भैरवाय नमः 
ॐ लोकपाल भैरवाय नमः 
ॐ दिकपाल भैरवाय नमः 

फिर जो भी आपको भय हो या हानि हो रही है उसे रोकने  उससे बचाव की प्रार्थना कर प्रणाम कर लौट आएं।

इसके बाद एक बार पुनः ये प्रयोग 3 जनवरी पूर्णिमा की शाम करें और इसके लाभ आप स्वयं अतिशीघ्र अनुभव करेंगे।

।।जय श्री राम।।

फोटो में पत्ते और सामग्री पे दिमाग न लगाएं AI से बनाया हुआ है सिर्फ समझाने के उद्देश्य से

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