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Sunday, 18 October 2026

नवरात्र विशेष: तंत्र बंधन काटने और सुरक्षा चक्र बनाने का प्रयोग

नवरात्र विशेष: तंत्र बंधन काटने और सुरक्षा चक्र बनाने का प्रयोग
श्री दुर्गा सप्तशती से

बहुत से लोगों के प्रश्न आते हैं कि हमारा चलता चलता काम अचानक से बंद गया है, बिक्री ठप हो गई है, पहले तो ग्राहक आते ही नहीं और ग्राहक आते हैं तो बस पूछ के चले जाते हैं और पास पास ही कई दुकानें उसी सामान की हैं,पड़ोस की दुकान वालों का काम अच्छा चलना शुरू हो गया है, डरावने सपने आते हैं, बिना कारण से भय लगता है, कई बार घर में किसी छाया अथवा आकृति का आभास होता है, प्रतिदिन घर में कलह क्लेश होता है, रोजी-रोटी बंद हो गई है, कमाई में बरकत नहीं हो रही है, अच्छी योग्यता होने के बावजूद जीवन में सफलता नहीं मिल रही हैं। कई सारे उपाय करने के बावजूद भी कुछ लाभ नहीं मिल रहा है आदि - आदि

आपके परिचित, जानने वाले अथवा प्रतिद्वंदी कई बार कुछ ईर्ष्या व द्वेष से ग्रसित व्यक्ति किसी तांत्रिक अथवा अशुभ शक्तियों का संचालन करने वाले व्यक्तियों के पास जाकर जिससे वह ईर्ष्या - द्वेष और नफरत करते हैं। उसके काम धंधे को बंधवा देते हैं या उनके घर परिवार में तंत्र प्रयोग के द्वारा शक्तियां भेजकर पारिवारिक सुख - समृद्धि, स्वास्थ्य आदि को खराब कर देते हैं। 


यदि आपको लगता है कि आपके यहां इस प्रकार की परेशानियां चल रही हैं तो

 श्री दुर्गा सप्तशती के 12 वें अध्याय के 19वें मंत्र के प्रयोग से मां भगवती जगदंबा की कृपा से किसी भी प्रकार की तंत्र क्रिया, बंधन क्रिया, अभिचार व अशुभ शक्तियों का समूल नाश होता है। 

इस मंत्र का विधिवत अनुष्ठान करने से रोजी-रोटी व किसी भी प्रकार का बंधन खुलता है। ऊपरी बाधा ,भूत प्रेत, ब्लैक मैजिक व तंत्र बाधा की काट होती है। 

आपके घर, दुकान प्रतिष्ठान के चारों तरफ सुरक्षा चक्र का निर्माण होता है जो भविष्य में इस प्रकार की किसी भी बाधा से आपकी रक्षा करता है।

मंत्र - ॐ ह्रीं दुर्वत्तानामशेषाणां बलहानिकरं परम रक्षो भूतपिशाचानां पठनादेव नाशनम् ह्रीं ॐ ।।

इस मंत्र का एक दिन में 11000 जाप करके सिद्ध कर लें अथवा नवरात्रि या गुप्त नवरात्रि में प्रतिदिन जाप करके मंत्र को सिद्ध कर लें। तत्पश्चात इस मंत्र का दशांश हवन, हवन का दशांश मार्जन व मार्जन का दशांश तर्पण करें। 
ये सभी सामग्री जप शुरू करने के पूर्व ही प्लेट में सामने रखकर बैठें, और जपविधि पूर्ण होने के पश्चात पुनः 1 माला जप कर प्रयोग करें।

सामग्री:  8 शमी की लकड़ी, 8 खैर की लकड़ी, 8 लोहे की कील, 8 पीली कौड़ी, 8 कमलगट्टे, 8 हल्दी की गांठ, 8 फूल वाली लौंग लेकर ऊपर बताए मंत्र से अभिमंत्रित करके उपद्रवी स्थान की 8 दिशाओं में गाड़ दें।

ध्यान रहे की यह पूरी प्रक्रिया मंत्र बोलते हुए अग्नि कोण से शुरू करके क्लॉक वाइज़  यानि घड़ी की दिशा में दक्षिण दिशा में जाना है और पूर्व दिशा में समाप्त होगी।  सामग्री कम से कम डेढ़ फुट  का गड्डा खोदकर दबानी चाहिए। कौड़ी चित्त (यानी खुला/कट वाला हिस्सा ऊपर) करके रखनी चाहिए। इस विधिपूर्वक भगवती के मंत्र का प्रयोग करने से वह स्थान सभी प्रकार की बाधाओं से रहित होकर श्रेष्ठ फल देने वाला हो जाता है। 

ये प्रयोग गुरदेव नागा महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा, धूनागिरी महाराज के सबसे वरिष्ठ शिष्य ब्रह्मलीन गंगागिरी महाराज ने 2011 में दिया था।

नोट: आपके इनबॉक्स में पूछे कुछ प्रश्नों के उत्तर

1. तरीका वही है देवी की प्रतिमा या फोटो के समक्ष 1 दिया घी और 1 तेल का, धूप, पुष्प आदि से पूजन, भोग में कोई दूध से बने खोये की मिठाई, या बूंदी के लड्डू या शक्कर के बताशे।
माला रुद्राक्ष की और आसन लाल।

2. मूल विधान एक दिन में ही करने का है, 11000 मंत्र जप, दशांश हवन, तर्पण, मार्जन में पूरा दिन लग जाएगा,सुबह से रात हो जाएगी, यदि स्वयं करने में, इतना लंबा बैठने में असमर्थ हों तो अपने पुरोहित या किसी योग्य ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं।

3. दूसरा तरीका है 3 दिन में पूर्ण करें और तीसरे दिन ही हवन आदि करें।

4. तीसरा विकल्प है 9 दिन में जप पूर्ण करें और 9वें दिन ही हवन तर्पण आदि कर के क्रिया पूर्ण करें।

5. यदि चाहें तो आपके लिए संकल्प करके आपके लिए उपरोक्त सामग्री सिद्ध करके आपको भेज सकते हैं, जिसे आप गड्ढा करके दबा सकते हैं। दक्षिणा देकर प्राप्त कर सकते हैं।

अन्य किसी जानकारी, समस्या समाधान एवं कुंडली विश्लेषण, औरा स्कैन और क्लीनिंग हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।

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Saturday, 10 October 2026

मत्स्यसूक्तोक्त दुर्गा संकट नाशन स्तोत्र

शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं 

।। मत्स्यसूक्तोक्त दुर्गा संकट नाशन स्तोत्र ।।

यह स्तोत्र परम्परागत रूप से "मत्स्यसूक्तोक्त दुर्गा संकट नाशन स्तोत्र" नाम से प्रसिद्ध है। इसमें माँ दुर्गा के विविध दिव्य स्वरूपों का स्तवन करते हुए उनकी शरणागति व्यक्त की गई है तथा साधक उनके चरणों में संकटों से रक्षा एवं मंगल की प्रार्थना करता है।
इस स्तोत्र की फलश्रुति में कहा गया है कि जो साधक श्रद्धापूर्वक एवं नित्य इसका पाठ करता है, उस पर देवी की कृपा बनी रहती है तथा धन-धान्य की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

।। अथ स्तोत्रम् ।।

ॐ परब्रह्म स्वरूपाञ्च वेदगर्भा जगन्मयीम्।
शरण्ये त्वामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।१।।

कामरूप्यां कामदां श्यामां कामरूपां मनोरमाम्।
ईश्वरीं त्वामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।२।।

त्रिनेत्रां हास्य संयुक्तां सर्वालंकार भूषिताम्।
विजयां त्वामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।३।।

ब्रह्मादिभिः स्त्रूयमानां सिद्धगन्धर्व सेविताम्।
भवानीं त्वामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।४।।

निशुम्भ शुम्भ मथिनीं महिषासुर घातिनीम्। 
दिव्यरूपामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।५।।

विंशत्यर्द्ध भुजां देवीं शुद्ध कांचन संनिभाम्।
गौरीरूपामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।६।।

त्रिशूलं खड्गं चक्रं च बाणं शक्तिं परश्वधम्।
दधानां त्वामहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।७।।

जगन्मयीं महा विद्यां सृष्टि संहार कारिणीम्।
सर्वदैव अहं वन्दे दुर्गां दुर्गति नाशिनीम्।।८।।

इदन्तु कवचं दिव्यं महा मन्त्रं महाफलम्। 
यः पठेन्मानवो नित्यं अस्मद्भक्ति समन्वितः।
धनं धान्यं प्रयच्छामि सकृदावर्तनेन तु।।९।।

।। इति मत्स्य सूक्तोक्त दुर्गा संकट नाशन स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।

अन्य किसी जानकारी, समस्या समाधान एवं कुंडली विश्लेषण, औरा स्कैनिंग, औरा क्लीनिंग, एनर्जी रीडिंग हेतु संपर्क करें 

।।जय श्री राम।।

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