Translate

Wednesday, 29 April 2026

नरसिंह Jayanti 2026/ नरसिंह जयंती 2026 विशेष

श्री नृसिंह जयंती की शुभकामनाएं

श्रीनृसिंहमालामन्त्रः 

श्रीगणेशाय नमः ।
अस्य श्रीनृसिंहमालामन्त्रस्य नारदभगवान् ऋषिः ।
अनुष्टुप्छन्दः । श्रीनृसिंहदेवता । आं बीजम् ।
लं शक्तिः । मेरुकीलकम् ।
श्रीनृसिंहप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥


ॐ नमो नृसिंहाय ज्वालामुखाग्निनेत्राय
शङ्खचक्रगदाप्रहस्ताय । योगरूपाय
हिरण्यकशिपुच्छेदनान्त्रमालाविभूषणाय
हन हन दह दह पच पच रक्ष वो
नृसिंहाय पूर्वदिशां बन्ध बन्ध
रौद्ररभसिंहाय दक्षिणदिशां बन्ध बन्ध (रौद्रनृसिंहाय)
पावननृसिंहाय पश्चिमदिशां बन्ध बन्ध
दारुणनृसिंहाय उत्तरदिशां बन्ध बन्ध
ज्वालानृसिंहाय आकाशदिशां बन्ध बन्ध
लक्ष्मीनृसिंहाय पातालदिशां बन्ध बन्ध
कः कः कम्पय कम्पय आवेशय आवेशय
अवतारय अवतारय शीघ्रं शीघ्रम् ॥

ॐ नमो नारसिंहाय नवकोटिदेवग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय अष्टकोटिगन्धर्वग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय सप्तकोटिकिन्नरग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय षट्कोटिशाकिनीग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय पञ्चकोटिपन्नगग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय चतुष्कोटिब्रह्मराक्षसग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय द्विकोटिदनुजग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय एककोटिग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय अरिमुरिचोरराक्षसजितिः वारं वारम् ।
श्रीभय चोरभय व्याधिभय
सकलभयकण्टकान् विध्वंसय विध्वंसय ।
शरणागत वज्रपञ्जराय विश्वहृदयाय
प्रह्लादवरदाय क्ष्रौं श्रीं नृसिंहाय स्वाहा ।
ॐ नमो नारसिंहाय मुद्गलशङ्खचक्रगदापद्महस्ताय
नीलप्रभाङ्गवर्णाय भीमाय भीषणाय
ज्वालाकरालभयभाषित
श्रीनृसिंहहिरण्यकशिपुवक्षस्थलविदारणाय
जय जय एहि एहि भगवन् भगवन् गरुडध्वज
गरुडध्वज मम सर्वोपद्रवं वज्रदेहेन चूर्णय
चूर्णय आपत्समुद्रं शोषय शोषय ।
असुरगन्धर्वयक्षब्रह्मराक्षसभूतप्रेतपिशाचादीन्
विध्वंसय विध्वंसय । पूर्वाखिलं मूलय मूलय ।
प्रतिच्छां स्तम्भय परमन्त्र परयन्त्र परतन्त्र
परकष्टं छिन्दि छिन्दि भिन्दि भिन्दि हुं फट् स्वाहा ।

इति श्रीअथर्वणवेदोक्त नृसिंहमालामन्त्रः समाप्तः ॥


अधिक जानकारी समस्या समाधान और कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।
7579400465
8909521616(whats app)

For easy & useful remedies visit:-

http://jyotish-tantra.blogspot.com

https://www.facebook.com/pages/Astrology-paid-service/552974648056772

Tuesday, 17 February 2026

संपत्ति प्राप्ति दुर्गाष्टोत्तरशतनाम कवच

भौमवती अमावस्या पर करें सुख सम्पत्ति हेतु यह प्रयोग

मित्रों,
17 फरवरी 2026 मंगलवार को भौमवती अमावस्या पर मंगलवार, शतभिशा नक्षत्र और अमावस्या का विशेष दुर्लभ योग बन रहा है ।
इस दिन माँ भगवती की पूजा का करके उन्हें प्रसन्न करके सुख सम्पदा ऐश्वर्य की प्राप्ति की जा सकती है इसका उल्लेख दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्त्रोत के श्लोक संख्या 18,19,20 में किया गया है ।

इससे पहले ये योग 17 मार्च 2016 में आया था और अब अगला योग वर्ष 2032 में पड़ेगा।
भौमवती अमावस्या का योग तो साल में एक दो बार मिल जाता है किंतु शतभिषा नक्षत्र के साथ ये अत्यंत दुर्लभ होता है।

2016 में भी हमने ये ताबीज बना कर कई मित्रों को दिया था और आज पुनः कुछ ताबीजों का निर्माण किया है।

श्री दुर्गा अष्टोत्तरशत नाम को भोज पत्र में लिख कर ताबीज़ में धारण करे ।
लिखने की स्याही की सामग्री स्तोत्र के अंत में ही वर्णित है।
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (श्री दुर्गा के एक सौ आठ नाम)

>ईश्वर उवाच:
> शतनाम प्रवक्ष्यामि शृणुष्व कमलानने। यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत् सती ॥1॥
> सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी। आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ॥2॥
> पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा महातपा:। मनो बुद्धिरहंकारा चित्तरूपा चिता चिति: ॥3॥
> सर्वमन्त्रमयी सत्ता सत्यानन्दस्वरूपिणी। अनन्ता भाविनी भाव्या भव्याभव्या सदागति: ॥4॥
> शाम्भवी देवमाता च चिन्ता रत्‍‌नप्रिया सदा। सर्वविद्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी ॥5॥
> अपर्णानेकवर्णा च पाटला पाटलावती। पट्टाम्बरपरीधाना कलमञ्जीररञ्जिनी ॥6॥
> अमेयविक्रमा क्रूरा सुन्दरी सुरसुन्दरी। वनदुर्गा च मातङ्गी मतङ्गमुनिपूजिता ॥7॥
> ब्राह्मी माहेश्वरी चैन्द्री कौमारी वैष्णवी तथा। चामुण्डा चैव वाराही लक्ष्मीश्च पुरुषाकृति: ॥8॥
> विमलोत्कर्षिणी ज्ञाना क्रिया नित्या च बुद्धिदा। बहुला बहुलप्रेमा सर्ववाहनवाहना ॥9॥
> निशुम्भशुम्भहननी महिषासुरमर्दिनी। मधुकैटभहन्त्री च चण्डमुण्डविनाशिनी ॥10॥
> सर्वासुरविनाशा च सर्वदानवघातिनी। सर्वशास्त्रमयी सत्या सर्वास्त्रधारिणी तथा ॥11॥
> अनेकशस्त्रहस्ता च अनेकास्त्रस्य धारिणी। कुमारी चैककन्या च कैशोरी युवती यति: ॥12॥
> अप्रौढा चैव प्रौढा च वृद्धमाता बलप्रदा। महोदरी मुक्त केशी घोररूपा महाबला ॥13॥
> अग्निज्वाला रौद्रमुखी कालरात्रिस्तपस्विनी। नारायणी भद्रकाली विष्णुमाया जलोदरी ॥14॥
> शिवदूती कराली च अनन्ता परमेश्वरी। कात्यायनी च सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मवादिनी ॥15॥
> य इदं प्रपठेन्नित्यं दुर्गानामशताष्टकम्। नासाध्यं विद्यते देवि त्रिषु लोकेषु पार्वति ॥16॥
> धनं धान्यं सुतं जायां हयं हस्तिनमेव च। चतुर्वर्ग तथा चान्ते लभेन्मुक्तिं च शाश्वतीम् ॥17॥
> कुमारीं पूजयित्वा तु ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम्। पूजयेत् परया भक्त्या पठेन्नामशताष्टकम् ॥18॥
> तस्य सिद्धिर्भवेद् देवि सर्वै: सुरवरैरपि। राजानो दासतां यान्ति राज्यश्रियमवापनुयात् ॥19॥
> गोरोचनालक्त ककुङ्कुमेन सिन्दूरकर्पूरमधुत्रयेण। विलिख्य यन्त्रं विधिना विधिज्ञो भवेत् सदा धारयते पुरारि: ॥20॥
> भौमावास्यानिशामग्रे चन्द्रे शतभिषां गते। विलिख्य प्रपठेत् स्तोत्रं स भवेत् सम्पदां पदम् ॥21॥
अर्थ
शंकरजी पार्वतीजी से कहते हैं- कमलानने! अब मैं अष्टोत्तरशत (108) नाम का वर्णन करता हूँ, सुनो; जिसके प्रसाद (पाठ या श्रवण) मात्र से परम साध्वी भगवती दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं॥1॥सती (दक्ष की बेटी), साध्वी (आशावादी), भवप्रीता (भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली), भवानी (ब्रह्मांड की निवास), भवमोचनी (संसारबंधनों से मुक्त करने वाली), आर्या, दुर्गा, जया, आद्य (शुरुआत की वास्तविकता), त्रिनेत्र (तीन आँखों वाली), शूलधारिणी, पिनाकधारिणी (शिव का त्रिशूल धारण करने वाली), चित्रा (सुरम्य), चण्डघण्टा (प्रचण्ड स्वर से घण्टानाद करने वाली), महातपा: (भारी तपस्या करने वाली), मन: (मनन-शक्ति), बुद्धि: (बोधशक्ति), अहंकारी (अहंताका आश्रय), चित्तरूपा (वह जो सोच की अवस्था में है), चिता, चिति: (चेतना), सर्वमन्त्रमयी, सत्ता (सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है), सत्यानन्दस्वरूपिणी (अनन्त आनंद का रुप), अनन्ता (जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं), भाविनी (सबको उत्पन्न करने वाली, ख़ूबसूरत औरत), भाव्या (भावना एवं ध्यान करने योग्य), भव्या (कल्याणरूपा, भव्यता के साथ), अभव्या (जिससे बढकर भव्य कुछ नहीं), सदागति (हमेशा गति में, मोक्ष दान), शाम्भवी (शिवप्रिया, शंभू की पत्नी), देवमाता, चिन्ता, रत्‍‌नप्रिया (गहने से प्यार), सर्वविद्या (ज्ञान का निवास), दक्षकन्या (दक्ष की बेटी), दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा (तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली), अनेकवर्णा (अनेक रंगों वाली), पाटला (लाल रंग वाली), पाटलावती (गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली), पट्टाम्बरपरीधाना (रेशमी वस्त्र पहनने वाली), कलमञ्जररञ्जिनी (मधुर ध्वनि करने वाले मञ्जीर/पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली), अमेयविक्रमा (असीम पराक्रमवाली), क्रूरा (दैत्यों के प्रति कठोर), सुन्दरी, सुरसुन्दरी, वनदुर्गा, मातङ्गी, मतङ्गमुनिपूजिता, ब्राह्मी, माहेश्वरी, इंद्री, कौमारी, वैष्णवी, चामुण्डा, वाराही, लक्ष्मी:, पुरुषाकृति: (वह जो पुस्र्ष का रूप ले ले), विमला (आनन्द प्रदान करने वाली), उत्कर्षिणी, ज्ञाना, क्रिया, नित्या, बुद्धिदा, बहुला, बहुलप्रेमा, सर्ववाहनवाहना, निशुम्भशुम्भहननी, महिषासुरमर्दिनि, मधुकैटभहंत्री, चण्डमुण्डविनाशिनि, सर्वासुरविनाशा, सर्वदानवघातिनी, सर्वशास्त्रमयी, सत्या, सर्वास्त्रधारिणी, अनेकशस्त्रहस्ता, अनेकास्त्रधारिणी, कुमारी, एककन्या, कैशोरी, युवती, यति, अप्रौढा (जो कभी पुराना ना हो), प्रौढा (जो पुराना है), वृद्धमाता, बलप्रदा, महोदरी, मुक्तकेशी, घोररूपा, महाबला, अग्निज्वाला, रौद्रमुखी, कालरात्रि:, तपस्विनी, नारायणी, भद्रकाली, विष्णुमाया, जलोदरी, शिवदूती, करली, अनन्ता (विनाशरहिता), परमेश्वरी, कात्यायनी, सावित्री, प्रत्यक्षा, ब्रह्मवादिनी ॥2-15॥देवी पार्वती! जो प्रतिदिन दुर्गाजी के इस अष्टोत्तरशतनाम का पाठ करता है, उसके लिये तीनों लोकों में कुछ भी असाध्य नहीं है ॥16॥ वह धन, धान्य, पुत्र, स्त्री, घोडा, हाथी, धर्म आदि चार पुरुषार्थ तथा अन्त में सनातन मुक्ति भी प्राप्त कर लेता है ॥17॥ कुमारी का पूजन और देवी सुरेश्वरी का ध्यान करके पराभक्ति के साथ उनका पूजन करे, फिर अष्टोत्तरशत नाम का पाठ आरम्भ करे ॥18॥ देवि! जो ऐसा करता है, उसे सब श्रेष्ठ देवताओं से भी सिद्धि प्राप्त होती है। राजा उसके दास हो जाते हैं। वह राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता है ॥19॥ गोरोचन, लाक्षा, कुङ्कुम, सिन्दूर, कपूर, घी (अथवा दूध), चीनी और मधु- इन वस्तुओं को एकत्र करके इनसे विधिपूर्वक यन्त्र लिखकर जो विधिज्ञ पुरुष सदा उस यन्त्र को धारण करता है, वह शिव के तुल्य (मोक्षरूप) हो जाता है ॥20॥ भौमवती अमावास्या की आधी रात में, जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हों, उस समय इस स्तोत्र को लिखकर जो इसका पाठ करता है, वह सम्पत्तिशाली होता है ॥21॥
मित्रों ये स्वयं महादेव के मुखकमल से वर्णित महासिद्ध प्रयोग है अतः इसे करने में संशय का कोई स्थान नहीं है।

ये ताबीज मंगवाने या अन्य किसी जानकारी , समस्या समाधान ,  अथवा कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।
7579400465
8909521616(whats app)